
समाज और साहित्य के मद्देनजर प्रदेश के 1000 साहित्यकारों का एक विशाल सेना, विचार और शब्दों के जरिए कर रहे समाज और साहित्य की सेवा, कवि हृदय, साहित्य सेवी व आरण्यक विप्र समाज शिरोमणि सूर्यप्रकाश पंडा ने दी इस पर वृहद जानकारी।
पुसौर तहसील क्षेत्र में पिछले कई वर्शो से ग्राम लोहर सिंह में भरत साहित्य मंडल की स्थापना हुई है जिसमें 1000 से अधिक साहित्यानुरागी एवं कवि हृदयों का एक समुह है जिनके संयुक्त तत्वावधान में जिले ही नहीं बल्कि देष के कई स्थानों में साहित्य सम्मेलन का आयोजन होता रहा है इसी कडी में इसका वार्षिक काव्य सम्मेलन घरघोड़ा विकास खण्ड के ग्राम बहिरकेला में किया गया। इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम बिहार बक्सर के डा0 कमलेश्वर श्रीवास्तव का काव्य संग्रह कमल की पंखुड़ियाँ ,जिसका प्रकाशन भरत साहित्य मंडल लोहरसिंग के द्वारा किया गया है, का विमोचन किया गया और एक संक्षिप्त समीक्षा भी की गई। साथ ही इस मंडल की वार्षिक साहित्यिक पत्रिका साहित्यानुराग अंक 5 का भी विमोचन किया गया जिसमें मंडल के प्रतिनिधि रचनाकारों की कविताएं संग्रहित हैं। इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी भी आयोजित की गई। स्थापना दिवस से ही भरत साहित्य मंडल अपने नीतियों के अनुसार छंद बद्ध रचना को प्रोत्साहित करता आ रहा है तथा नवोदित रचनाकारों को छंद युक्त रचना करने के लिए मार्गदर्शन और मंच दे रहा है । इस मंडल नें अपने दूसरे लक्ष्य में सुदूर ग्रामीण अंचलों में अपने कार्यक्रमों का आयोजन कर ग्रामीण हिन्दी सेवियों की पहंचान किया है और उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया जिससे समाज की रीतियां, समस्याएं, जीवन शैली आधारित मौलिक चिंतन को साहित्य में स्थान मिल रहा है जिससे विचार और भावनाएं बाहर आ रहीं हैं । आज के इस कार्यक्रम में मंडल के वरिष्ठ रचनाकारों ने अपने काव्य पाठ और उद्बोधनों में ग्रामीण प्रतिभाओं के मन में सृजन का बीज बोने का कार्य किया है जिससे आने वाले समय में अनेक रचनाकार एक आदर्श चरित्र अपनाकर समाज को नई दिशा दे सकेंगे। संस्थापक भारत नायक बाबूजी विगत पचपन वर्षों से इस साधना में जुटे हैं साथ ही वयःश्रेष्ठ श्री रामभजन पटेल जी संरक्षक हैं । इनके मार्गदर्शन में वरिष्ठ रचनाकार निर्भय गुप्ता, सूर्यकुमार पंडा, डा0वासुदेव यादव आनंद त्रिवेदी , बी एन शर्मा , गुलाब कंवर , नेतराम राठिया , जयंत कल्चुरी , रामकुमार पटेल , गिरधारीलाल चौहान कवयित्री संतोषी सिदार झनक राम पटेल सहित देश के अनेक वरिष्ठ रचनाकार इस मंच से जुड़कर साहित्य साधना में अग्रसर हैं । हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में इनका प्रयास निश्चित ही सराहनीय है ।
