
फ्लाईएस परिवहन के अच्छा खासा मुख्यमंत्री सड़क ने लीं अंतिम सांस, इसमें कमाने वाले कमा गए और जिनका काम होना था हो गया वो भी इस मुख्यमंत्री सड़क के कब्र में पांव रख कर, जिम्मेदार कौन और कार्यवाही किस पर होनी चाहिए, सवाल जनता का सरकार पर।
पुसौर तहसील क्षेत्र के ग्राम टपरदा में खेल मैदान समतलीकरण कार्य के लिये वहां सैकडों ट्रकों से फ्लाईएस डाले गये जिसका वजन 15 से 20 टन होने के कारण टपरदा से एन एच रोड तक का मुख्य मंत्री सडक पुर्ण रूप से खराब हो गया है और वर्तमान स्थिति में बाईक सवार लोगों व फोर व्हीलरों को भी जाने आने में परेषानी उठाना पड रहा है। ज्ञात हो कि उक्त सडक फ्लाईएस वाहनों के चलने के पुर्व बिल्कुल ठीक था , लोग आराम से खेती के ट्रेक्टर, कार बोलेरो आदि के साथ आना जाना करते थे जो फ्लाईएस के वाहन लगभग एक महिने तक चलने के बाद उक्त रोड पुर्ण रूप से खराब हो गया है जो इन दिनों वाहनों के आते जाते समय अब दुर्घटनाओं की भी सुचना देने लगे हैं। इस संबंध में क्षेत्र के लोगों के साथ साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में सरपंच बिडीसी एवं जिला पंचायत सदस्य ने भी इसके लिये मुख्य सडक विभाग में दस्तक दे चुकी हैं कि जल्द से जल्द इस रोड का निर्माण किया जाये। इसमें इनका यह भी कहना है कि यह रोड गुणवत्तायुक्त बने जिससे कि भारी वाहन भी चल सके। ज्ञात हो कि इस रोड के किनारे ही एक निजी राईस मिल है जहां निष्चित ही भारी वाहनों का अवागमन होगा ऐसे में यह रोड कम दबाब वाली बनेगी तो जल्द ही खराब हो सकता है। सुत्रों के मुताविक मुख्य मंत्री सडक विभाग का इसमें कहना है कि मुख्यमंत्री सडक प्रायः ग्रामीण आवागमन के लिये बनता है जिसमें अधिक से अधिक ट्रेक्टर एवं आम फोर व्हीलरों के आने जाने हेतु बनाया जाता है और इसमें भारी वाहनों के चलने के लिये सख्त मनाही होती है। ऐसे में यहां अब यह सवाल उठता है कि क्या राईस मिल के संचालक उक्त सडक में क्या अपना धान या कोंढा से भरा ट्रक नहीं चलायेगा या फ्लाईएस जैसे भारी वाहन नहीं चलेंगे? जो विभाग, षासन और आम जनता के लिये सोचनीय है।
