
प्रदेश के सरकार में आए 2 साल बाद भी बनी है ये स्थिति, कारगुज़ारी पर उठ रहे सवाल, सत्ता दल के लोगों के मंसूबों में फिर रहा पानी, आम जनता का रुक रहा काम, सरकार अपने किस चाल को अंजाम देगी भाप नहीं पा रहे लोग। चुप चाप देख रहे लोग सरकार की गहरी चाल।
प्रदेष में कोई भी सरकार आये वह सरकार नगरी निकायों के चुनाव के बाद एल्डरमेनों की नियुक्ति करता है लेकिन नगरी निकाय चुनाव को आज लगभग साल भर होने जा रहे हैं सरकार ने एल्डरमेन की नियुक्तियां नहीं कर पाई है। चुनाव के समय पुसौर के नगर पंचायत में 4 एल्डरमेन की नियुक्ति करने की घोशणा किये जाने की बात कही गई है इसके लिये नगर पंचायत के भाजपेईयों में एक आशा की किरण ऐसा है कि उनका एल्डरमेन में नियुक्ति हो सकता है, इसमें इनका पार्टी के लिए किए गए काम का हवाला दिया जा रहा है। वहीं एक तथ्य यह भी है कि पुर्व प्रदेष सरकारों ने चुनाव के बाद विभागों के संचालन के लिये विधान सभा के सदस्य अपनी प्रतिनिधि नियुक्ति करते थे जो आज लगभग 2 वर्श हो चुके है वहां ये अपनी प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किये हैं इसी कडी में सांसद के भी प्रतिनिधि नियुक्त होते थे जो अब तक नहीं हो पाये हैं। बताया जाता है कि निगमों के अध्यक्षों का चुनाव कर दिया गया है लेकिन उसके कार्यकारिणी सदस्यों का भी चयन नहीं किया गया है। इन सारे स्थिति में पुसौर क्षेत्र के भाजपाईयों में जहां एक मानसिक द्वंद चल रहा है वहीं प्रदेष के सारे निकायों के भाजपाईयों में एक विष्लेशण होता होगा, ऐसा संभावना लगाया जा सकता है, जो अपनी अपनी उपस्थिति को भुनाते हुये अपना नाम चयन प्रक्रिया में षामिल करने प्रयासरत होंगे। जानकारों की माने तो प्रदेष सरकार के उपर आर्थिक भार बहुत ज्यादा आ पडा है जिसमें एक खास राषि प्रति माह महतारी वंदना का है। एल्डरमेन की नियुक्ति किये जाने के बाद उन्हें मासिक मानदेय देने के साथ उन्हें साल भर के लिये फंड मुहैया कराना होता है। समुचे प्रदेष के निकायों के एल्डरमेनों के मानदेय एवं सालाना फंड को जोडा जाये अरबो रूपये हो सकते हैं इसलिये सरकार इसकी नियुक्ति में विलंब किये जाने की बात कही जा रही है। सरकार में रहे विधायक अपने प्रतिनिधि के नियुक्ति को लेकर यह तथ्य सामने आया है कि प्रतिनिधि नियुक्ति से विभागीय कार्य सहित जन साधारण को अपने काम कराने में सरल एवं सहजता आ सकती है लेकिन इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में आपसी मतभेद होने की अंदेषा है इसलिये अब तक प्रदेष के सत्ता पक्ष के विधायक गण अपनी विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति नहीं किये है जबकि इसके पुर्व प्रत्येक विभाग के अलग अलग प्रतिनिधि नियुक्त किये जाते थे जो विधायक के अनुपस्थिति में ये प्रतिनिधि गण लोगों का काम कराते थे।
एल्डरमेनों का कार्यकाल होगा लगभग ढाई साल
प्रदेष सरकार कुछ महिने बाद निकायों में एल्डरमेन नियुक्ति करने के बाद उन एल्डरमेनों का कार्यकाल लगभग ढाई साल ही हो सकता है चूंकि 2 साल से अधिक सरकार के कार्यकाल हो चुके हैं। एल्डरमेन इन ढाई सालों में सरकार द्वारा सालाना कितना फंड मिलेगा और वह राषि विकास कार्य के लिये किस तरह और कैसे उपयोग होंगे इसमें संतुलन बिठाना षायद सहज नहीं हो सकता है। पुर्व सरकारों में जितने भी एल्डरमेन नियुक्त हुये थे उनका कार्यकाल साढे तीन साल से अधिक होना बताया जाता है और उनका फंड भी लोगों के सुविधा हेतु खर्च किये जाने की बात कही जाती है।
प्रतिनिधियों के अभाव में रूक रहा लोगों का कामः
क्षेत्र के लोगों से मिले जानकारी के मुताविक प्रतिनिधि के जरिये कोई भी सरकारी काम को संपन्न कराने में सफलता मिलती है चूंकि विभागों के प्रत्येक काम को क्षेत्रीय विधायक से संपर्क करना आसान नहीं होता , इसलिये संबंधित लोगों का काम रूक जाता है। पुर्व भाजपा षासन में आकाष गुप्ता जनपद के लिये प्रतिनिधि रहे, इसी तरह थाना, उज्ज्वला गैस, तहसील, हास्पीटल सहित सभी विभागों के अलग अलग प्रतिनिधि रहे और कांग्रेस षासन काल में भी ऐसा ही रहा।
कांग्रेसी विधायकों के प्रतिनिधि सम्हाल रहे काम
बताया जाता है कि सत्ता पक्ष के विधायक ही अपना प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किया है जबकि वहीं कांग्रेसी विधायकों द्वारा अपने क्षेत्र के लोगों के काम को आसान करने अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है। इसमें खरसिया, लैलुगा, धर्मजयगढ विधान सभा क्षेत्र का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। पुसौर जनपद कार्यालय में अब भी खरसिया विधायक के प्रतिनिधि बैठकों में षामिल होने तथा उस क्षेत्र के लोगों के काम को कराने के लिये इनकी उपस्थिति आये दिन होती रही है। सत्ता पक्ष के लोगों की माने तो बगैर प्रतिनिधि बनाये भी लोगों का काम हो रहा है चूंकि संगठन से जुडे लोग इसमें आगे आ रहे हैं और जहां कोई त्रुटि अथवा विपरीत परिस्थिति निर्मित होती है तो उसे ये सम्हालते हुये संपन्न करा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान प्रदेष षासन द्वारा पुराने पंरपरा से इतर एक नवीन प्रयोग करते हुये सरकार चलाया जा रहा है इसमें लोग कितने सहमत और संतुश्ट है यह आने वाले समय में पता चलेगा जो सरकार के सेहत में कितना प्रतिकुल अथवा अनुकुल होगा।
