मौका जांच के लिये पहुंचे नायब तहसीलदार पंकज मिश्रा, ख.नं. 948, 949/2 रकबा क्रमषः 0.1420, 0.490 हे. में धान फसल खडा मिला, पंचनामा तैयार कर कार्यवाही पुरी हुई। क्या इस कार्यवाही में किसान के भुगतान में होल्ड लगेंगे इस पर भी उठ रहे सवाल।
पुसौर तहसील क्षेत्र के सेवा सहकारी समिति पडिगांव के उपार्जन केन्द्र में एक किसान द्वारा अपने तैयार धान फसल को काटे बगैर उस खसरा व रकबा के स्थान पर धान बेच दिया जिसकी शिकायत जिला प्रषासन के समक्ष पहुंचने पर मामला हरकत में आया जिसकी तस्दीग के लिये नायब तहसीलदार पंकज मिश्रा मौके पर पंहुचे। उक्त मामला ग्राम सुरजगढ के एक किसान सुरेष केवट का है जिसके 7 ख.नं. के रकबा 1.5870 हे पंजीयन में है इस आधार पर उक्त रकबा पर 81 क्विंटल 60 किलो धान इसने बेचा जबकि अब भी मौके पर ख.नं. 948, 949/2 रकबा क्रमषः 0.1420, 0.490 हे. का धान फसल खडा है। उक्त किसान इस खसरा रकबा के धान फसल के स्थान पर कहां से धान लाकर बेचा यह एक जांच का विशय है जिसके लिये षासन प्रषासन के लोगों पर सवाल खडे हो रहे हैं चूंकि बाहरी धान न आये इसके लिये चहुं ओर सषक्त पहरा है। इसमें किसान का कहना है कि मेरे खेत में फसल ज्यादा हुआ था इसलिये रकबा के अनुसार धान बेच दिया और जो धान खडा है उसे खाने के लिये रखा गया है। लोगों का मानना है कि उपार्जन केन्द्रों में लाये गये धान बाहरी है या क्षेत्रीय है इसकी कोई पहचान नहीं होती वहीं छोटे किसान की ये क्षमता नहीं होती कि वो 20 30 क्विंटल कहीं बाहर से लाकर खपत करा सके। इस तथ्य पर कुछ लोगों का यह भी मानना है कि बाहरी धान का आवक खेतों के रास्ते से हो रहा है जिसका उपयोग बडे किसान जो कि अपने खेत को रेग अध्या में दिये रहते हैं और वे उचित फसल नहीं ले पाते ऐसे स्थिति में ये धान उपार्जन केन्द्रों में ले जाकर खपाते हैं। ज्ञात हो कि गिरदावरी के जरिये ही किसान धान बेच सकता है और फसल को लेकर ज्यादातर किसानों का कहना है कि प्रति एकड 21 क्विंटल धान कमाना आसान नहीं है, औसतन किसान 18 से 20 क्विंटल ही कमा पाते हैं और इस आधार पर प्रत्येक वर्श खसरा समर्पण भी होता रहा है। बहरहाल सुरेष केवट के धान बेचने का मामला गर्म है षासन प्रषासन के लोग इस पर किस तरह कार्यवाही करेगे इस पर लोगों में चर्चा है।
