
3 साल से ये मजदूर अपने पंचायत और जनपद पंचायत पुसौर का काट रहे चक्कर, जबकि गोठान में 64 लाख खर्च किए जाने की मिल रही जानकारी, क्या इन मजदूरों के पैसे किसी के पैकेट में है या सरकारी खजाने में, कब होगी तपतीस और होगा दूध का दूध और पानी का पानी और मजदूरों को उनको राशि।
पुसौर जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत लोहाखान में बिते कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गोठान का निर्माण किया गया। उक्त गोठान निर्माण में एनटीपीसी लारा द्वारा प्रदाय किये गये रायलीटी राषि के 64 लाख रूपये खर्च किये जाने का बोर्ड वहीं गोठान स्थल में चस्पा है साथ में षासन के मनरेगा विभाग से 12 लाख खर्च किये होने का बोर्ड चस्पा है। किये गये पडताल में चारागाह बनाने हेतु 54 लाख खर्च हुये है जिसमें केवल बाउंड््री तार घेरा गया है जिसमें गेट भी षामिल है। लगे हुये नलकुप में मोटर नहीं है और कुछ सौर उर्जा वाले छतरी है। लोहाखान एवं झीलगीटार के कुछ महिला मजदुरों के मजदुरी राषि नहीं मिलने के तथ्य पर यह पडताल हुआ जिसमें उक्त महिलाओं ने आकर बताया कि हम गोठान में काम किये थे हमारे कई मजदुरों के बीस बीस हजार रूप्ये मजदुरी राषि लेना बाकि है जिसके लिये सचिव एवं रोजगार सहायक को कई बार आवेदन किया इसके बावजुद भी इसका भुगतान नहीं हो पाया है। ज्ञात हो कि पुर्व सरकार द्वारा स्थापित गोठान योजना में षासन के अरबों रूपये व्यय हुये हैं जिसमें कई गोठानों में ऐसे उपकरण लगे हुये जो करोडों रूपये हो सकते हैं और ये सारे उपकरण बिन मालिक के ऐसे पडे हैं जिसे कोई भी ले जाकर निजी उपयोग कर सकता है ऐसे स्थिति में सीधा सीधा षासकीय राषि का दुरूपयोग है। वर्तमान सरकार जिस तर्ज पर पुराने खातों में बचे षेश राषि को अपने अधीन ले रही है उसी तर्ज पर गोठानों में हुये खर्च की जांच किया जाना न्यायोचित प्रतीत हो रहा है जिसमें जिन कर्मकारों का मजदुरी राषि बकाया है उन्हें उनका राषि मिलेगा वहीं वास्तविक षासकीय राषि एवं उसके संपत्ति की जानकारी होगी।
