
तीन शिफ्ट के ड्यूटी के बीच ज्यादातर कर्मचारी रहे अफसेंट, कभी कभी खाना पूर्ति के नाम से कुछ समय के लिए दिखते थे तैनात कर्मचारी, गांव का सबसे छोटा और हमेशा खड़ा कर्मचारी कोटवार की रही सबसे बड़ी जिम्मेदारी, चेक पोस्ट में कोई हो न हो ये जरूर रहते तैनात, मिलनी चाहिए इन्हें आर्थिक एवार्ड।
पुसौर और रायगढ तहसील क्षेत्र अन्तर्गत जितने भी अवैध धान के आवक को रोकने के लिये चेक पोस्ट बनाये गये थे उसमें अक्सर कोटवार ही तैनात मिलते थे वहीं उनके साथ लगे अन्य कर्मचारी कभी रहते थे और कभी नहीं मिलते थे। इसमें कोटवार को पुछने पर बताते थे कि अभी भी बस्ती गये हैं या किसी काम के लिये गये हैंे। पुसौर क्षेत्र के लारा, रेंगालपाली, बिंजकोट और रायगढ क्षेत्र के भुईयापाली, बेलरिया बेरियर में इसी तरह की स्थिति होना बताया जा रहा है। बेरियर में जिन कर्मचारियों की ड्यूटी होती थी उसका एक रजिस्टर रहता है जिसमें संबंधित कर्मचारीयों के नाम व हस्ताक्षर भी है। बेरियरों में 3 षिप्ट में ड्यूटी लगाई गई थी जिसमें 8 से 6, 6 से 2 और 2 बजे से 8 बजे तक होती थी। ये तो तय है कि धान के अवैध कारोबारी दिन को धान पार नहीं कर रहे होंगे और करते भी होंगे तो रोड के रास्तों से तो बिल्कुल भी नहीं करेंगे चूंकि उनके लिये खेतों का रावन रास्ता होता है। अब रात को किसी भी चेक पोस्ट में धान के अवैध आवक को रोकने के लिये कितने वाहनों की चेक की गई यह जानकारी षासन को षायद लेने की जरूरत है जिससे कि तैनात कर्मचारियों का बेरियर में तैनाती का मुहर लगाया जा सके। सुत्रों की माने तो षासन के धान खरीदी के बीच पुसौर और रायगढ तहसील क्षेत्र में अवैध धान के आवकों की संख्या 70 से अधिक बताया जा रहा है जिसकी तस्दीक सक्षम अधिकारियों द्वारा की गई है। चेक पोस्ट में कोटवारों के ड्यूटी और सेवा के मद्देनजर लोगों का मानना है कि इन्हें इसका किसी भी तरह का पारितोषिक मिलना चाहिए।
