
जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण जन परेशान, कहते हैं कैसा सरकार है भाई जो कार्यादेश के बाद भी जन हित से जुड़े छोटे छोटे निर्माण कार्यों के लिए नहीं दे रही राशि और अपनी राजनीति चमकाने खर्च कर रही अरबों रुपए, क्या यही है गुड गवर्नेस,,,,।
पंचायत चुनाव के बाद पंचायतों को अब तक जितने भी काम स्वीकृत हुये हैं उनमें से कोई भी काम अब तक शुरू नहीं हुआ है जिसका कारण षासन द्वारा राषि जारी नही किये जाने की बात कही जा रही है जिसमें पुसौर नहीं बल्कि समुचे प्रदेष के ग्राम पंचायतों में षासन के इस उपेक्षा पर संबंधित जनप्रतिनिधियों द्वारा असंतोश जाहिर किया जा रहा है। इस तथ्य की पुश्टी जिला पंचायत रायगढ द्वारा निर्माण कार्यो के स्वीकृत आदेष के साथ ही जारी कार्यादेष से की जा सकती है। जानकारी के मुताविक जिला पत्र क्रमांक 1520 दिनांक 29.4.2025 छत्तीसगढ राज्य ग्रामीण क्षेत्र एवं विकास प्राधिकरण अंतर्गत जिले के पुसौर जनपद अधीन ग्राम पंचायत ओडेकेरा के दो स्थलों ख.न.200/4 आबादी भूमि तथा ख.नं.321 आबादी भूमि में 10-10 लाख की लागत से सीसी रोड निर्माण किया जाना था, इसी तरह बाघाडोला के ख.नं. 76 आबादी में, कोडातराई के ख.नं. 704/1 आबादी भूमि में तथा बेलपाली के ख.नं. 145 षासकीय भूमि में क्रमषः 10लाख, 10 लाख और 5 लाख की स्वीकृत आदेष सहित जनपद कार्यालय द्वारा कार्यादेष भी जारी कर दिया गया है जिसमें प्रथम किष्त की राषि 4 लाख रूप्ये निर्माण एजेन्सी को भुगतान करने का भी आदेष है। उक्त आदेष को आज 9 माह हो चुके हैं षासन द्वारा इस निर्माण कार्यो के लिये राषि जारी नहीं की गई है जिससे संबंधित ग्राम पंचायतों के लोगों में षासन के प्रति असंतोश जाहिर करने के साथ ही भरोशा दिनों दिन कम होना बताया जा रहा है। इस संबंध में पुसौर जनपद के पुर्व सरपंच अध्यक्ष एवं वर्तमान कोडातराई सरपंच मृत्युंजय सिंह ठाकुर सहित अन्य सरपंचों ने बताया कि षासन द्वारा जहां स्वीकृत निर्माण कार्यो के राषि जारी नहीं की जा रही है वहीं पन्द्रहवे वित्त के राषि सहित अन्य राषि जो पंचायतों को प्रदाय किये जाते रहे हैं वह राषि भी चुनाव के बाद से नहीं आये हैं। इस समय 15वे वित्त की राषि जो आया है वह पंचायतों में काम कर रहे कार्यालय सहायकों के वेतन भुगतान भी नहीं हो पाया है तो पंचायतों के बाकि जरूरतें कैसे पुरे हो सकते हैं। इसमें सरपंचों का कहना है कि हमारे पंचायत वासी हमें जिस भरोसे में मतदान किया है उसमें अब तक खरा नहीं उतर पायें हैं जिससे उनका कोप भाजन बनना पड रहा है और वे अब निश्कृय सरपंच का हवाला दे रहे हैं।
