
प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा को होता है भागवत का लय बद्ध गान, दूर दराज से आते श्रद्धालु, गायक और कथावाचक, युवा पीढ़ी भी इस पर दे रहे रुचि, वो भी उड़िया सीखते हुए अब करने लगे भागवत।
पुसौर क्षेत्र के ग्राम गोतमा को भागवत्् गाने, गुरूगोविन्द करने सहित सनातन संस्कृति को नियमित रूप से बरकरार रखने के लिये जाना जाता है चूंकि इस ग्राम में प्रतिवर्श क्षेत्र के सभी भगवत् प्रेमियों को निमंत्रित कर उनसे भक्ती गीत सुनते हैं और इस प्रकार समुचा ग्राम भक्ति के माहौल में सराबोर रहता हैं। इससे इतर यहां के लोग अपने अपने श्रद्धा अनुसार भी निजी तौर पर अपने अपने घर में भी गायकों को बुलाकर उडीया भागवत के एकादष स्कंद अथवा नवम स्कंद का सस्वर पाठ कराते हैं जिसमें आस पडोस के लोग षामिल रहते हैं। इसी कडी में जोगेष्वर गुप्ता के यहां उडीया भागवत के एकादषकंद का पाठ किया गया जिसमें आसपास के गायक गण अपनी अपनी गायकी कला के साथ भक्ति का भी प्रदर्षन किया जिससे एक पारा मोहल्ला ही नहीं बल्कि समुचा ग्राम उल्लासित रहा। जानकारी के मुताविक आयोजक ने भागवत् के मधुर व पाप नाषिनी षब्द सबके जेहन में पहुंचे इसके लिये लाउडीस्पीकर का भी व्यवस्था किया था वहीं आये हुये सभी लोगों को भोजन प्रसादी भी मुहैया कराया।
