
तुम्हर हाथ तुम्हर टोकन की वेब साइड हुआ बंद, टोकन करने के अन्य तीन वेब साइड भी अब हो चुका बंद, परेशान होकर खरीदी केंद्र से किसान फोन कर रहे हैं जिले के अधिकारियों को, कभी जवाब देते है या फिर नहीं, रकबा समर्पण याने धान कम बेच पाए किसान और बचे सरकारी की राशि, गुड गवर्नेस की ये कैसे कार्यवाही, उठ रहे सवाल,,।
अब धान खरीदी कार्य लगभग एक पखवाडा ही चलने वाला है और इस बिच अब भी कई केन्द्रों में सैकडों किसान धान बेचने के लिये टोकन कटवाने के फिराक में हैं जिन्हें टोकन नहीं मिल रहा। इस तथ्य की पडताल किये जाने पर षासन द्वारा जारी टोकन का वेब साईड बंद बता रहा है वहीं केन्द्रों में भी आन लाईन टोकन नहीं कट रहा है और टोकन जब नहीं कट रहा है तो षासन के उच्चाधिकारियों के मौखिक आदेष पर राजस्व अमला रकबा समर्पण के लिये ऐसे प्रयासरत है मानों रकबा समर्पण नहीं होने से उन पर कोई गाज गिर सकता है। जानकारी के मुताविक तिलगी सोसायटी मे कुल 812 किसान में से 555 किसान धान बेच चुके हैं जिसमें 109 किसानों के टोकन अब तक एक भी नहीं कटे हैं। जो किसान एक बार बेच चुके हैं उनका दुबारा टोकन कटा है ऐसे किसान 42 है। 28 किसान ऐसे है जो एक बार बेचे हैं जो दुबारा टोकन कटाने के लिये प्रयासरत हैं लेकिन उनका टोकन नही कट रहा है। इसी तरह की स्थिति छिछोर उमरिया, तेतला तथा बुनगा केन्द्र में भी है जहां टोकन तो कट नहीं रहा लेकिन रकबा समर्पण के लिये अमला सक्रिय है। नाम न छापने के षर्त पर रकबा समर्पण के लिये जुडे कर्मचारियों का कहना है कि यह कार्य उच्चाधिकारियों के मौखिक आदेष के तहत चल रहा है जिसे हम बहुत कठिन परिस्थिति से गुजरते हुये कर रहे हैं इसके लिये कहीं निवेदन तो कहीं थोडी जबरदस्ती करना पड रहा है जो हमें नागवार गुजर रहा है।
