
पुसौर के बोरोडीपा से बाजार चौक के बीच अब तक हिट एंड रन से 4 लोगों से अधिक लोगों की हुई है मृत्यु, दुर्घटना के कुछ दिन तक प्रशासन रहती एलर्ट मोड पर, फिर चली जाती कुंभकर्णी नींद में जब तक कि फिर कोई वारदात न हो जाए, स्थानीय प्रशासन भी नहीं स्वीकार रही अपनी जवाबदेही।
बोरोडिपा से बाजार चौक तक दुर्घटनाओं का इतिहास देखा जाये तो लापरवाही पूर्वक तेज गति से चलने वालों वाहनों के कारण 5 ताजा दुर्घटनायें हैं जिसमें लोगों की जान चली गई है, दुर्घटना के बाद कुछ ही दिन तक स्थानीय प्रषासन हरकत में रहता है और सावधानी बरतने की हिदायद के साथ कुछ कार्यवाही करती है उसके बाद फिर से वैसे ही लोग लापरवाही व अनियंत्रित होकर वाहन चला रहे हैं जिसके कारण प्रायः सभी दिन लोग बाल बाल बचते नजर आ रहे हैं। जानकारों की माने तो इसके लिये ब्रेकर की व्यवस्था कहीं नहीं दी गई है जिसके कारण हास्पीटल के सामने, जनपद कार्यालय के सामने, स्कुल के सामने, सरकारी शराब दुकान के सामने सहित अन्य चौक चैराहों में भी वाहन धीरे नहीं चल रहे हैं जिसके कारण दुर्घटना होते रहा है और उसकी अंदेषा बनी हुई है। गायत्री मंदिर के सामने एनटीपीसी क्षेत्र के ग्राम आरमुडा का एक नाबालिक बाईकर्स के तेज रफ्तार से एक 6 साल की बच्ची को टक्कर लगी और उसका मौके पर ही मृत्यु हो गई। सरकारी कार्यवाही कहां तक पहुंची यह तो पता नहीं लेकिन नगर के लोग उसके प्रति संवदेना जताने नगर के मुख्य मार्ग पर मोमबत्ती जलाकर उसके आत्मा की षांति के लिये रैली निकाली और उसके परिवार जनों को ढांढस बंधाया। आदर्ष ग्राम्यभारती स्कुल के पास इसी तरह ट्रक के चपेट में एक महिला के मौत होने की रिपोर्ट पुसौर थाने में दर्ज है इसी क्रम में छींच चैक के पास व बाजार चैक के पास भी हुये दुर्घटनाओं में मौके पर मौत हुये है। बाईक से बाईक टकराकर , फोरव्हीलर का बाईक से टकराकर, आगे पिछे बगैर देखे किसी साईड में मोडने पर दुर्घटनायें अक्सर होते रहे हैं जिसमें सामान्य चोटों के साथ साथ अंग भंग होने की भी खबर है जिसका मुख्य कारण वाहनों का तेज और अनियंत्रित गति से चलना बताया जा रहा है जो कि ब्रेकर के जरिये ही कम हो सकता है जिसे बनाने के लिये स्थानीय प्रषासन सहित सरकार संवेदनषील नही है।
गतिरोधक बनाने से बचती रही पीडब्लुडीः
घनी आबादी, स्कुल अस्पताल कार्यालय, ट्रेफिक घनत्व तथा दुघटनाओं के इतिहास को देखते हुये षासन एवं स्थानीय प्रषासन स्वयं संज्ञान लेकर जगह जगह ब्रेकर बना सकती है। कुछ साल पहले सडक बनाते समय ब्रेकर बनाने विधिवत् आवेदन किया गया था तब कहीं ब्रेकर बन पाया और इस समय पुनः नया सडक बनने के कारण इसके लिये मिन्नते करना पड रहा है। कोडातराई एन एच मार्ग में, उडीसा के एन एच मार्ग में गतिरोधक की ऐसे व्यवस्था है जिसमें वाहन कंट्रोल में चल रहे हैं बावजुद इसके वहां दुर्घटनायें हो रहे हैं और यहां कोई ब्रेकर नहीं है ऐसे में दुर्घटनाओं की स्थिति कैसे बनती होगी इस पर कयास लगाया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से यह तथ्य स्पश्ट है कि सुरक्षा और दुघटना के रोकथाम, ट्रेफिक घनत्व और दुर्घटनाओं के इतिहास तथा सार्वजनिक हित के लिये निर्माण ऐजेन्सी गतिरोधक बना सकती है लेकिन निर्माण ऐजेन्सी पीडब्लु के आला अधिकारी इसके लिये प्रस्ताव और मंजुरी लगेगा कहकर पल्ला झाड रहे हैं जिससे वाहने बेतरतीब चल रहे हैं और दुर्घटनाओं क्रम बना हुआ है। ज्ञात हो कि नये बने हुये रोड को पुनः मरम्मत करना पड रहा है इसके लिये कहीं दरारें भरने के लिये सिमेंट का उपयोग हो रहा है तो कहीं धंसे हुये रोड को उखाड कर बनाया जा रहा है ऐसे स्थिति में निर्माण ऐजेन्सी चाहे तो जरूरत के अनुसार ब्रेकर बना सकता है।
