
दशकों वर्ष पूर्व से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का उदाहरण रही गुलापी सुनामलिया गुप्ता। धर्मपरायण रहकर बेटियों को उचित शिक्षा व सामाजिक व्यवहार दिलाने सफल रहीं गुलापी देवी, पति के निधन के बाद भी बेटियों को मुकाम तक पहुंचाने करते रहे प्रयास।
पुसौर के गोटिया मालगुजार परिवार की बहु गुलापी गुप्ता जी का लगभग 85 वर्ष के उम्र में देहावसान हुआ। इनके पति सुनामलिया गुप्ता एक शासकीय शिक्षक थे जिन्हें वेद वेदांग सहित सहित प्रमुख धार्मिक पुस्तकों का ज्ञान था इसलिए वे अपने कार्यकाल में आए दिन धार्मिक विवेचना में शामिल होते थे और अपनी इन्हीं धार्मिक प्रवृति के कारण गायत्री मंदिर की स्थापना के लिए बेस कीमती रोड किनारे की लगभग 7 डिसमिल जमीन दान दिया जिसकी भव्यता पुसौर के लोगों को जहां एक दिशा देती है वहीं उसे एक परिचय भी मिलता रहा है। इनके धार्मिक व शैक्षणिक वातावरण में पले बढ़े इनके 4 बेटियां पार्थवी, पंकजीनी, गुणवती व सौदामिनी अपने शैक्षणिक योग्यता व आचरण के बलबूते किसी केयर ऑफ के मोहताज नहीं है बल्कि ये स्वयं में ही पर्याप्त है। गुलापी देवी के धर्म परायण प्रवृति उनके अंतिम सांस तक रही जिसके फलस्वरूप उनके निधन होने पर पुसौर के ज्यादातर लोगों ने संवेदना जताते हुए उनके चारों बेटियोंको ढांढस बंधाने का प्रयास किया और अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए। ईन्होंने गायत्री मंदिर के लिए जो जमीन दान दी, वह पुसौर के लोगों के लिए एक अमूल्य उपहार है। उनकी धार्मिक प्रवृत्ति और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उनके परिवार को एक मजबूत आधार दिया है। उनकी चार बेटियाँ पार्थवी, पंकजीनी, गुणवती, और सौदामिनी अपनी माँ की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। गुलापी जी के निधन पर पुसौर के लोगों ने जो संवेदना जताई है, वह उनके प्रति उनके सम्मान और प्यार को दर्शाता है। उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को इस दुख की घड़ी में शक्ति मिले।
