राजस्व विभाग की बड़ी  लापरवाहीः 6 एकड रकबा केलो नहर में शामिल किसान  परेसान

      पटवारी, आर आई के कारगुज़ारी में उठ रहे सवाल, किसान के बगैर जानकारी में उसके काश्तकारी जमीन नहर में हो गया शामिल, दुर्भावना या लापरवाही दोनों हो रहे उजागर, प्रशासन सुस्त और किसान पस्त।
        कोई किसान साल भर अपने खेत में मेहनत मषक्कत कर बोआई रोपाई कटाई करने के बाद जब वह उस फसल को बेचने की कवायद करता है तो संबंधित भूमि रकबा किसी केलो परियोजना के अधिन चला गया हो और वह अपनी फसल बेचने राजस्व विभाग और केलो परियोजना विभाग को जा जा कर परेषान हो गया हो तो इसके लिये जिम्मेदार कौन होगा? साथ में अपने खेतों में काम करना छोड इन विभागों का चक्कर लगा रहा है इसकी भरपाई कौन करेगा? इस तरह की परेषानी पुसौर तहसील क्षेत्र के ग्राम सिहा के एक किसान को करना पड रहा है जिसके लगभग 6 एकड रकबा केलो परियोजना के नहर निर्माण में अधिग्रहित कर लिया गया है और जो सोसायटी के धान पंजीयन सूचि में नहीं दिखा रहा है जिससे वह धान नहीं बेच पा रहा है। जानकारी के मुताविक ग्राम सिहा के माखनु वल्द मंगलु जाति कोल्ता ह.नं. 35 राजस्व मंडल बडेभंडार के काष्तकारी भूमि ख.नं. 103/1,104/2,114/2ख,122/2, इस प्रकार कुल 15 ख.नं. है जिसका रकबा 2.1590हे. है। उक्त भूमि में बिते वर्श कमाये हुये धान इसने सोसायटी में बेचा था और एकाएक इस वर्श यह भूमि केलो परियाजना विभाग द्वारा अधिग्रहित कर लिये जाने की बात इसके सामने आई। इसके लिये स्वयं किसान तथा इसके परिजन परेषान है चूंकि साल भर का खर्चा इसी धान से ही चलता है। इनके परिवार के विनोद गुप्ता पिता माखनु गुप्ता का कहना है कि हम अपने उक्त भूमि का रकबा संषोधन के लिये एसडीएम और तहसीलदार का चक्कर कई बार लगा चुके हैं जहां हमारे जमीन की स्थिति का पता नहीं लग पाया और अब केलो परियोजना में इसकी जांच कराया जिसमें केलो परियोजना के रिकार्ड में उक्त जमीन किसी भी तरह से अधिग्रहित नहीं किया जाना बताया गया, जिसकी जानकारी मय दस्तावेज के प्राप्त हो चुकी है। ज्ञात हो कि उक्त किसान विनोद गुप्ता 4 माह पहले अपनी यही स्वामित्व की लगभग 6 एकड भूमि का भारतीय स्टेट बैंक में केसीसी लोन भी बनवाया है और अभी यही भूमि न केलो परियोजना के रिकार्ड में है और न सोसायटी के रिकार्ड में है ऐसे में यह जमीन गया तो गया कहां? जो राजस्व विभाग के एक बडे लापरवाही को दर्षाता है। जानकार बताते हैं कि कुछ माह पहले केलो नहर निर्माण को लेकर जिला प्रषासन हरकत में आया और राजस्व विभाग की लगातार बैठकें ली जिसमें क्षेत्र के राजस्व कर्मचारी गण हडबडी में संतुलन बिठाने रकबे इधर उधर किये गये जो कि कई किसानों के लिये यह नुकसानदेय रहा। बताया जाता है कि ज्यादातर किसान के रकबे अधिग्रहित किये जाने हेतु जिला प्रषासन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है जिसके कारण यह रकबा न सोसायटी में दिख रहा है न केलो परियोजना के रिकार्ड में। इसी में से एक किसान यह ग्राम सिहा का हो सकता है। इस संबंध में तहसील कार्यालय पुसौर से मिली जानकारी अनुसार यह त्रुटि हल्का पटवारी द्वारा हो सकता है। इसके लिये उसे रकबा मिलान करते हुये किसान के स्वामित्व की भूमि को उसके नाम में पुनः इन्द्राज करना होगा। उक्त गडबडी को लेकर हल्का पटवारी, आरआई से इनका पक्ष जानने की कोषिष की गई जिसमें सफलता नहीं मिली।

Goutam Panda

Goutam Panda

EDITOR - CG LIVE NEWS

More Posts - Website

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *