
सुर्री, पुसौर, 27 अप्रैल 2026 – ग्राम सुर्री में रविवार को आयोजित एक विवाह समारोह सामाजिक एकता और बेटियों के सम्मान का प्रतीक बन गया। गांव के महेत्तर सिदार की सुपुत्री वेदमती उर्फ कृति सिदार के विवाह में ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती मीनाक्षी टेकलाल नायक ने कन्यादान की रस्म निभाई। सरपंच के हाथों कन्यादान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गांव ने एक बार फिर बेटियों के प्रति अपने स्नेह और सम्मान को दर्शाया।
मंगल गीतों के साथ निभाई रस्म
विवाह के शुभ मुहूर्त में ढोल-नगाड़ों और मंगल गीतों के बीच सरपंच मीनाक्षी नायक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कन्यादान किया। उन्होंने कहा, “बेटियां पूरे गांव की साझी होती हैं। वेदमती के विवाह में कन्यादान करना मेरे लिए सौभाग्य और गर्व की बात है। यह परंपरा समाज में समरसता और बेटियों के सम्मान को मजबूत करती है।” ज्ञात हो कि ग्राम सूरी में बेटियों के विवाह में सरपंच मिनाक्षी ने शामिल होकर सम्पूर्ण रस्मो का निर्वाह करते हुए अपनी ओर से 21000 रु नगद भेट करते आ रहे है।
जनप्रतिनिधि से लेकर वरिष्ठजन रहे उपस्थित
इस अवसर पर ग्राम की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती मोगरा नायक, पंच श्रीमती प्रभा सिदार, उपसरपंच सुरेंद्र कुर्रे, पूर्व उपसरपंच एवं पंच खिरसागर नायक, पंच अजीत यादव, ग्राम सचिव शैलेंद्र गोयल तथा कोडातराई पंचायत सचिव टेकलाल नायक विशेष रूप से मौजूद रहे। साथ ही गांव के वरिष्ठ नागरिक बालमुकुंद चौधरी, अश्विनी नायक, चिनीलाल सिदार, सत्यानंद नायक, जागेश्वर सिदार, गंगाधर कुर्रे, फागूलाल नायक, भोजराम पटेल, दिनेश नायक, कैलाश पटेल, लोचन यादव, प्रेमशंकर सिदार, संतोष कुर्रे, खगेश्वर कुर्रे, गिरधारी पटेल, मुनू नायक, गजानंद नायक, दिनमणि पटेल एवं आनंदराम पटेल ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देकर उनके सुखी दांपत्य जीवन की कामना की।
बेटियों के सम्मान की परंपरा कायम
ग्राम सुर्री में जनप्रतिनिधियों द्वारा कन्यादान करने की परंपरा पिछले कुछ वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। इससे न केवल सामाजिक एकता को बल मिलता है, बल्कि बेटियों के प्रति सम्मान का संदेश भी पूरे क्षेत्र में जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी पहल से गांव में आपसी भाईचारा और भी मजबूत होता है।
एकजुट दिखा पूरा गांव
विवाह समारोह में पंच-सरपंच से लेकर बुजुर्गों और युवाओं तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गांव वालों ने मिलकर भोजन, स्वागत और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग किया। पूरे आयोजन के दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा। वेदमती की विदाई के समय कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
