
शासन, प्रशासन और किसान थाह न पाए एग्रीटेक को, एग्रीटेक सूची में पुसौर तहसील के प्रत्येक ग्राम के कम से 5 किसान इसके गिरफ्त में, शायद नहीं बेच पाएंगे धान।
शासन द्वारा किये गये इस वर्श की धन खरीदी कार्य किसानों के लिये यादगार रहेगा और ये किसान षासन के इस एग्रीस्टेक मुद्दे को लेकर कई सालों तक भूल नहीं पायेगे। इस तरह की स्थिति सभी किसानों के साथ हुआ है ऐसा नहीं है इसमें कुछ किसान सामान्य रूप से तहसील, पटवारी एवं सहकारी समिति में एक बार पहुंच कर अपना काम करा लिया है वहीं कुछ किसान ऐसे है जो 18 से 20 हजार रूपये खर्च कर चुके हैं उसके बावजुद भी उनका रकबा अब तक एग्रीस्टेक के सुचि में षामिल नहीं हो पाया है। इसमें छिछोर उमरिया, कोडपाली, पडिगांव, बडेभंडार, केषला के बडे बडे किसान है जो कि बिते वर्श अपने इसी रकबे में धान बेचा था और इस वर्श एग्रीस्टेक में संबंधित रकबा नहीं दिखाया जिसके कारण पटवारी, तहसील और सोसायटी कई बार इन्हौने गये, उन्हें उनके सेवा षुल्क दिये जबकि ये षासन प्रषासन के लोग हैं। ज्ञात हो कि एग्रीस्टेक में रकबा षामिल करने की प्रक्रिया को तहसील कार्यालय सहित संबंधित अन्य लोगों को जानकारी नहीं हो पाने की स्थिति में सैकडों की संख्या में किसान दर्रामुडा के एक कम्प्युटर आपरेटर के यहां जा कर अपना काम कराया है इसके बावजुद भी अब तक कई रकबा का एग्रीस्टेक नहीं हो पाया। बिते दिनांक के षाम को जहां लोग पुसपुनी त्यौहार का आनंद उठाने की तैयारी कर रहे थे वहीं कुछ किसान थक हार कर जनपद के पास मिले जिन्हौने अपनी यह व्यथा सुनाया। ये सुर्खियों से दुर रहने वाले किसान है जो मन मसोस कर किसी भी तरह अपना काम कराने वालों में से है जिन्हें षासन प्रषासन के लोग बखुबी जानते हैं बावजुद इसके इनका काम को पुरा कराने के लिये कोई आगे नहीं आते।
