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पुसौर क्षेत्र के पंचायतों व निकाय की राशन दुकानों में गड़बड़ी, संचालकों पर करोड़ों की शासकीय राशि दबाने का आरोप, महिला समूहों की आड़ में ठेकेदारों का कब्जा

कलेक्ट्रेट का खाद्य शाखा

        पुसौर, रायगढ़, 29 अप्रैल 2026 – पुसौर विकासखंड की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। आरोप है कि दर्जनों दुकान संचालक हर महीने लाखों रुपये की शासकीय राशि शासन के खाते में जमा ही नहीं कर रहे। वहीं महिला स्व-सहायता समूहों के नाम पर आवंटित दुकानों पर बाहरी ठेकेदारों का कब्जा है। क्षेत्र की 89 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश में यही हालात बताए जा रहे हैं।

कैसे हो रहा है खेल: समूह के नाम, काम ठेकेदार का
     नियमानुसार शासकीय राशन दुकान का आवंटन प्राथमिकता के आधार पर महिला स्व-सहायता समूहों, सहकारी समितियों और ग्राम पंचायतों को किया जाता है। पुसौर में कई दुकानें महिला समूहों के नाम पर आवंटित हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि समूह की महिलाओं को हर महीने 2 से 3 हजार रुपये देकर दुकान का पूरा संचालन बाहरी ठेकेदार कर रहे हैं। कई पंचायत के जागरूक लोगों  ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारे यहां महिला समूह के नाम पर दुकान है, पर चलाता ठेकेदार है। स्टॉक, बिल, वसूली सब वही देखता है। समूह की दीदियों को महीने में एक बार बुलाकर अंगूठा लगवा लिया जाता है।”

राशि जमा नहीं, फिर भी चल रहा कारोबार
        नियमानुसार संचालकों को हर माह राशन वितरण के बाद उपभोक्ताओं से प्राप्त राशि को ई-चालान के माध्यम से शासन के खाते में जमा करना होता है। लेकिन सूत्रों का दावा है कि पुसौर क्षेत्र के कई संचालक 3 से 6 महीने तक राशि दबाकर बैठे हैं। पीडीएस पोर्टल पर ऑनलाइन वितरण दिखाकर अगला आवंटन भी उठा लिया जाता है, जबकि पिछली राशि जमा नहीं होती।अनुमान है कि पूरे ब्लॉक में हर माह 40 से 50 लाख रुपये की राशि समय पर जमा नहीं हो रही। ऐसे में बकाया करोड़ों में पहुंच गया है।

चोरी की एफआईआर, पर कार्रवाई शून्य
      पिछले कई सालों से क्षेत्र दर्जनों  से अधिक राशन दुकानों में चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। संचालकों ने पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई। लेकिन आज तक किसी भी मामले में रिकवरी या गिरफ्तारी नहीं हुई। ग्रामीणों को संदेह है कि स्टॉक में हेरफेर छिपाने के लिए ‘चोरी’ का बहाना बनाया जा रहा है।

ग्राम तड़ीला के एक पूर्व पंच ने कहा, “दुकान में 50 क्विंटल चावल 1 क्विंटल शक्कर चोरी होना बताया गया, उसकी पुसौर थाने में रिपोर्ट भी हुई पुलिस भी खानापूर्ति कर चली गई। न जांच हुई, न वसूली।” इसके साथ ही न खाद्य विभाग द्वारा कोई कारगर कदम उठाया गया।

खाद्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
     स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला विपणन संघ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि नियमित भौतिक सत्यापन, मासिक ऑडिट और सरप्राइज इंस्पेक्शन नहीं होते। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर संचालक मनमानी कर रहे हैं। कई राशन दुकानों का संचालन रोजगार सहायक, सचिव, राजनीतिक पार्टी के नेता कर रहे है जिनका कि उस क्षेत्र से उनका कोई लेना देना नहीं रहता। बताया जाता है कि ये खाद्य विभाग के आला अधिकारियों के गुड बुक में दर्ज रहते है साथ रूलिंग पार्टी के लोगों के चहेते होते हैं जिसके फलस्वरूप कोई भी नियम कानून इनका बाल बांका नहीं कर सकता। लोगों के बीच ये राशन दुकान संचालन में नुकसान होने का हवाला देते है जबकि इनकी वास्तविक वित्तीय स्थिति कुछ और बयां कर रहा है।

गरीबों के हक पर संकट
    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शासकीय राशि समय पर जमा नहीं होगी तो आवंटन प्रक्रिया बाधित होगी। इससे अंततः गरीब हितग्राहियों को मिलने वाले राशन पर असर पड़ सकता है। साथ ही महिला सशक्तिकरण की शासकीय मंशा को भी धक्का लग रहा है, क्योंकि समूहों को सिर्फ ‘नाम के लिए’ इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्या है मांग
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि क्षेत्र के गरीब उपभोक्ता और जागरूक लोगों ने कलेक्टर रायगढ़ और जिला खाद्य नियंत्रक से मांग की है कि:

  1. पिछले 2 वर्षों की सभी दुकानों का विशेष ऑडिट कराया जाए।
  2. बकाया राशि मय ब्याज के वसूल कर दोषी संचालकों का लाइसेंस निरस्त किया जाए।
  3. महिला समूह की दुकानों का संचालन समूह की महिलाएं ही करें, यह सुनिश्चित किया जाए।
  4. चोरी के दर्ज मामलों की दोबारा जांच कर स्टॉक मिलान कराया जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी के साथ निवेदन भी किया  है कि जल्द ही जल्द इस पर  ठोस कार्रवाई हो। ज्ञात हो कि कई पंचायत के लोगों ने मुखर एवं आक्रामक होकर कलेक्ट्रेट में इस व्यवस्था के खिलाफ आवेदन प्रस्तुत किया है । खाद्य विभाग के अधिकारियों से शासन का पक्ष जानने उनसे संपर्क किया गया जिसमें ये उसमें प्राथमिकता नहीं दी । सूत्र बताते है  खाद्य विभाग को जिले के अन्य पंचायत क्षेत्र से इस तरह की शिकायतें मिली हैं, जिसमें इन्होंने जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी का हवाला दिया है।

Goutam Panda

Goutam Panda

EDITOR - CG LIVE NEWS

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