अपने माता पिता के सेवा और आशीर्वाद से स्वस्थ और दीर्घायु रहकर इन्हें अपने 5 पीढ़ी से रूबरू होने का मिला अवसर, कुटिलता और द्वेष रहित रहकर उद्यमशीलता के भरोसे सहज और सरल रहा इनका जीवन, क्षमता के मुताबिक बच्चों को वो तालीम दिए जिसमें मिले उन्हें उनके अपने अपने मुकाम।

उन दिनों ठंडा राम गुप्ता जी का नाम उनके व्यक्तिगत जीवन शैली, समाज के प्रति उनका अवदान और परिवार के लिए उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर किसी परिचय का मोहताज नहीं था बल्कि लोग उनसे जुड़ने के लिए लालायित रहते थे चूंकि उनके सरल सहज हृदय लोगो का आकर्षण रहा, राम जन्म भूमि अयोध्या की यात्रा वहां मंदिर बनने से पहले ये किए थे। समाज के साथ एक सूत्र में बंधे रहने ये तथा इनके पिता कईयों के साथ मितान भी बैठे थे जिसे वे स्वयं तो निभाए वहीं उनके परिवार जन भी निभाते आ रहे है। उम्र दराज और पीढ़ियों के प्रभुता के फल स्वरूप वर्तमान पीढ़ी उनके पोते हरि गुप्ता के दादा जी के नाम से जानते हैं।
ज्ञात हो कि नगर पंचायत पुसौर के बस स्टैण्ड मे स्थापित गुप्ता वस्त्र भंडार के प्रधानसंचालक दिनेष गुप्ता के पिता ठंडाराम गुप्ता का निधन बिते दिनांक को हो गया। इनके निधन के खबर से उनसे जुडे लोग उनके मुल निवास स्थान कोल्ता पारा पहुंचे जहां उनका पार्थिव षरीर के साथ उनके परिजन मौजुद रहे जिन्हें बाजा गाजा के साथ घर से उनकी शव यात्रा निकाली गई जिसमें नगर के नगर उपाध्यक्ष उमेष साव, पुर्व अध्यक्ष किषोर कसेर, रितेष थवाईत, पार्शद निराकार पटेल पुर्व पार्शद बैकुंठ गुप्ता, जगन्नाथ प्रधान सहित अन्य गणमान्य लोग षामिल रहे। उक्त षव यात्रा पुसौर के रायगढीया मुडा तालाब के पास ले जाया गया जहां उनका षव दाह किया गया। दिनेष गुप्ता सहित इनके अन्य दो पुत्रों के सिर से पिता का साया सदा सदा के लिये उठ चुका वहीं उनके कवि हृदय एवं पत्रकार पोता हरि गुप्ता के सामने भी बेहद खेद जनक क्षण है। लोग बताते हैं कि ठंडाराम गुप्ता अपने माता पिता की सेवा में कभी कोई कसर नहीं छोडी वहीं समाजिक व्यवहार को लेकर भी इनका समुचित गतिविधि सकारात्मक रहा। इनके उद्यमषीलता, सरल सहज और निश्कपट भाव परिवार को जोडे रखने में ऐसा कारगर रहा कि इन्हें अपने परपोते को देखने का अवसर मिला जो कि सबको नसीब नहीं होता।
