अभिनव विद्या मंदिर हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के बारहवीं के विद्यार्थियों को दी गई भावभीनी विदाई, आंखे नम हुई, गले मिले,  और कहा अब होगा जीवन का नवीन अध्याय,,,,

समारोह के बाद स्कूल कैंपस में
अपने स्कूल से विदा ले रहे छात्र

          पारिवारिक पृष्ठ भूमि में अभिनव स्कूल के छात्रों का आपसी तालमेल में रहता गहरा लगाव, इसलिए कभी न हुआ छात्रों में आपसी संघर्ष, शिक्षा  संस्कार और  स्वास्थ्य  से जुड़े मामलों से इसलिए सदेव रहे ओतप्रोत, और यही है स्कूल प्रबंधन का ध्येय।
           पुसौर, प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी कक्षा ग्यारहवीं कला विज्ञान वाणिज्य एवं कृषि संकाय के विद्यार्थियों द्वारा कक्षा बारहवीं के चारों संकाय के विद्यार्थियों को भावभीनी विदाई दी गई। मां सरस्वती की पूजा अर्चना के बाद बारहवीं के विद्यार्थियों को तिलक एवं पुष्प वृष्टि कर स्वागत किया गया। उपस्थित शिक्षक शिक्षिकाओं का स्वागत किया गया। कक्षा बारहवीं के छात्र अपना अपना अनुभव साझा किए। 12 से 14 वर्ष का अनुभव साझा करते समय कई छात्र भावुक हो गए। अपने अपने विषय शिक्षक शिक्षिकाओं के अनुशासन एवं ज्ञान को भी याद किए। प्राचार्य अक्षय कुमार सतपथी,विषय शिक्षक शिक्षिकाओं में फूल चंद गुप्ता, उमेश कुमार साव , विश्व जीत साव, विकास चंद्र दुबे, जगन्नाथ प्रधान, संतोष पटेल,ओमप्रकाश साहू, भास्कर भोय,सनत कुमार विश्वाल,सत्यम भोय,निखिल महापात्र,सुलभा साव, मनोरमा शर्मा , अंग्रेजी माध्यम के प्राचार्य श्रीमती मंजू लता गुप्ता, इंद्रजीत बारीक, श्रीमती पद्मलया देहरी,श्रीमती कामिनी शर्मा, प्रांजल पंडा,किशन पटेल, श्रीमती प्रीति गुप्ता, सरोज कुमार प्रधान,केदार देहरी, अभिनव सतपथी, अभिषेक गुप्ता, प्रीतेश पंडा, जगन्नाथ प्रधान आदि ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए परीक्षा की तैयारी के बारे में जानकारी दिए। शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम एवं टाप टेन में जगह बनाने हेतु आशीर्वाद दिए। कार्यक्रम का संचालन ताराचंद गुप्ता द्वारा किया गया।अंत में ग्यारहवीं के विद्यार्थियों द्वारा शुभकामनाओं सहित उपहार भेंट कर स्वल्पाहार दिया गया। उल्लेखनीय है कि अभिनव स्कूल में के जी 1 में दाखिल होने वाले छात्र को उसके कक्षा 12 वीं तक के पढ़ाई करते तक 14 वर्ष लग जाते है ऐसे स्थिति में लीजिमी है छात्रों  में एक बंधुत्व भाव बन जाते है वहीं वे एक दूसरे को दुख सुख का साथी समझते हैं और उसमें जब दूर होने का अवसर आता है तो वह स्थिति निसंदेह हृदय पर पत्थर रखने जैसा है लेकिन इससे गुजरना भी जरूरी है। इसमें छात्र ही नहीं शिक्षक और प्रबंधन भी बखूबी अनुभव करता रहा है।

Goutam Panda

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EDITOR - CG LIVE NEWS

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