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कोरबा-रायगढ़ सीमा विवाद में अटकी रेत खदानें, 500 मीटर की दूरी बनी कानूनी पेंच

      जनसुनवाई के बाद ही खुलेगा रास्ता, पर्यावरण मंजूरी का. इंतजार कर रहे रायगढ़ के दो रेतघाट*
        रायगढ़, 15 जून 2026। कोरबा जिले की एक रेत खदान की स्वीकृति ने रायगढ़ जिले के दो रेतघाटों का काम रोक दिया है। छाल तहसील के मांड नदी में स्थित जोगड़ा-1 और जोगड़ा-2 रेत खदानें अब नए कानूनी पेंच में फंस गई हैं। मामला कोरबा और रायगढ़ जिले की सीमा पर तीनों खदानों के बीच 500 मीटर से कम दूरी का है।
क्या है पूरा मामला
          रायगढ़ जिले में वर्तमान में केवल एक ही रेतघाट स्वीकृत है। पूर्व में 15 रेत खदानों की नीलामी हुई थी। पर्यावरणीय मंजूरी मिलते ही उत्पादन शुरू हो जाता है। छाल तहसील में मांड नदी के दूसरे छोर पर कोरबा जिले ने एक रेत घाट स्वीकृत कर खनन भी शुरू कर दिया है। इसी घाट के ठीक सामने रायगढ़ जिले की जोगड़ा-1 और जोगड़ा-2 खदानें चिन्हित की गई थीं। दोनों रेतघाट खसरा नंबर 452 में स्वीकृत हैं। नियमानुसार दो रेत खदानों के बीच न्यूनतम 500 मीटर की दूरी अनिवार्य है। लेकिन कोरबा की खदान स्वीकृत होने के बाद तीनों खदानें 500 मीटर से कम दूरी पर सट गई हैं। इस वजह से अब रायगढ़ की दोनों खदानों का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
अब जनसुनवाई ही एकमात्र रास्ता
       खनिज विभाग के नियमानुसार अब रायगढ़ जिले को इन दोनों खदानों के लिए नए सिरे से जनसुनवाई करानी होगी। या फिर दोनों जिलों को मिलकर नए लोकेशन पर सहमति बनानी होगी। इसके बाद ही पर्यावरणीय स्वीकृति का प्रस्ताव संचालनालय भेजा जा सकेगा।
नीलामी के 7 महीने बाद भी EC नहीं
       पहले कांग्रेस सरकार के समय रेत खदानों की नीलामी समय पर नहीं हुई थी। अब भाजपा सरकार में भी प्रक्रिया लेटलतीफी का शिकार हो रही है। नवंबर में नीलामी पूरी हो चुकी है। करीब 7 महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इससे जिले में रेत की किल्लत और दाम दोनों बढ़ने की आशंका है।
विभाग क्या कह रहा है
        खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामला पर्यावरण मंजूरी का है। जैसे ही जनसुनवाई पूरी होगी और नए सिरे से प्रस्ताव बनेगा, तत्काल संचालनालय भेजा जाएगा। विभाग की कोशिश है कि मानसून से पहले प्रक्रिया पूरी कर ली जाए ताकि निर्माण कार्य प्रभावित न हों।
असर क्या होगा

  1. रेत महंगी: जिले में स्वीकृत खदान सिर्फ एक होने से रेत के दाम बढ़ सकते हैं।
  2. अवैध खनन का खतरा: वैध रेत न मिलने पर अवैध खनन को बढ़ावा मिलने की आशंका।
  3. विकास कार्य प्रभावित: सरकारी-निजी निर्माण प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
    फिलहाल रायगढ़ के दोनों रेतघाट कोरबा की एक खदान के चक्कर में फंसे हैं। अब सबकी नजर जनसुनवाई की तारीख और दोनों जिलों के सामंजस्य पर टिकी है।
Goutam Panda

Goutam Panda

EDITOR - CG LIVE NEWS

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