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विष्णुचरण गुप्ता: एक ऐसा नाम जो शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के क्षेत्र में हमेशा याद किया जाएगा”

ग्राम केनसरा के मालगुजार पुत्र स्व विष्णुचरण गुप्ता

           “विष्णुचरण गुप्ता: एक महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम से चिन्हित तो नहीं लेकिन रहा  इनके योगदान की चर्चा,  शिक्षाविद् और समाज सुधारक” के रूप में इनकी दक्षता का आंकलन,  “पुसौर के गौरव: विष्णुचरण गुप्ता की जीवन यात्रा और उनके कार्यों का एक विस्तृत विवरण”

             पुसौर में शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के संस्थापक विष्णुचरण जी की 14वीं पुण्यतिथि तिथि को लेकर क्षेत्र में कई तरह के आयोजन करने की तैयारी जारी है । पुसौर थाना क्षेत्र के प्रमुख ग्राम केनसरा के मालगुजार पुत्र विष्णुचरण गुप्ता ने रायगढ़ नटवर हाई स्कूल में सन् 1945 में मैट्रिक पास किया और उसके बाद उन्होंने जमींदारी और अंग्रेजों का प्रखर विरोध किया। उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति को जगह-जगह स्थापित करने के साथ ही उसे बढ़ावा दिया। तात्कालीन समय के राजनीतिक पार्टी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े अपने साथी पूर्णचंद गुप्ता, छत्तरसिंह गुप्ता, चतुर्भुज पंडा सहित दर्जनों लोगों के टीम के साथ मिलकर रायगढ़ रियासत के ग्रामों में इसे मूर्तरूप दिया। इससे आज की स्थिति में शिक्षा एवं स्वास्थ्य संस्थाने स्थापित तो हैं, वहीं शासन द्वारा नवांकुर लाया जाकर उसमें काफी विस्तार दिया गया है। इसमें से एक पुसौर में स्थापित शासकीय विष्णुचरण महाविद्यालय है।

           विष्णुचरण गुप्ता के समकालीन रायगढ़ के स्वतंत्रता सेनानी, जननायक एवं एमएलए रहे रामकुमार गुप्ता ने विष्णुचरण गुप्ता के अंतिम समय में अपने चिट्ठी में इनके नाम से महाविद्यालय स्थापना को छोड़कर उपरोक्त सभी तथ्यों का हवाला देते हुए कहा है कि उस समय शिक्षा वहीं ग्रहण कर पाते थे जिसका वास्तविक रुचि हो, संपन्न हो और संसाधन हो। इसमें विष्णुचरण गुप्ता ही पुसौर थाना क्षेत्र में इकलौता रहे जिन्होंने अपने कम उम्र में ही ये मैट्रिक पास कर लिए। ये चाहते तो तात्कालीन अंग्रेज शासन में किसी विभाग में अफसर रह सकते थे, लेकिन इन्होंने अंग्रेजी हुकुमत का विरोध किया और शिक्षा को ही जीने का हथियार समझने का सूक्ति वाक्य से लोगों को जागरूक किया। अंग्रेजी बोलने, पढ़ने और अंग्रेजों से किसी तथ्य को लेकर मुखर होकर बात करने की कला इनमें थी, जिससे अंग्रेज अफसर इनसे दूरी बनाते थे।

             आजाद भारत में इनके इन्हीं जागरूकता एवं समर्पण भाव को लेकर ये पुसौर जनपद में अध्यक्ष भी रहे। उस समय किसी भी प्रकार का शासकीय फंड नहीं होने से ये निजी खर्च व जनभागीदारी से कोडातराई, पुसौर, रेंगालपाली, पडिगांव सहित अन्य क्षेत्र के प्रमुख गांवों में स्कूल स्थापित करने में सफल हुए।संस्कृत और उड़िया भाषा में भी इनका काफी दखल था। गीता, उपनिषद, उड़िया का श्रीमद भागवत, हरिवंश पुराण, महाभारत आदि ग्रंथों का स्वयं भी अध्ययन करते थे और कथा वाचक अथवा सस्वर गायक को निमंत्रित कर उसका आनंद लेते थे। इसके कारण ग्राम केनसरा में महीनों लोगों की रेलपेल रहती थी, संतो व कथावाचकों का सेवा सुविधा आदि के लिए समूचा ग्राम जुटा होता था और पूरे ग्राम की गलियां मेले में तब्दील होते देखे जाते थे।

            अपने चिट्ठी में आगे इन्होंने लिखा है कि उस समय प्रायः ग्रामों का पहुंच मार्ग पगडंडी अथवा खेतों का रावन रास्ता होता था, जिसमें आवागमन सुलभ करने जनभागीदारी रोड बनाया जिसका ज्यादातर संसाधन एवं राशि विष्णुचरण गुप्ता का रहा। हैजा, माता, टीव्ही जैसे असाध्य रोगों के चपेट से जागरूकता एवं स्वास्थ्य संसाधन की कमी से अधिकतर लोगों का असमय मृत्यु हो जाता था, जिसके लिए इन्होंने क्षेत्र के हिसाब से प्रमुख प्रमुख गांवों में अस्पताल खोले। प्रारंभ में तो सभी अस्पतालों में प्रायः आयुर्वेद चिकित्सा की ही व्यवस्था रही, लेकिन यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने में ऐसे सफल रहा कि असमय मृत्यु दर दिनों दिन कम होते गया। पुसौर में स्व सूर्यदास महाणा द्वारा यह कहते हुए लोग सुने हैं कि पुसौर थाना क्षेत्र के ज्यादातर मालगुजार लोगों का यह मंशा रहता था कि स्कूल में लोग पढ़ेंगे तो हमारा खेती व मवेशी कौन सम्हालेगा, हमारे सेवा में कौन रहेगा। इससे इतर विष्णुचरण गुप्ता का चरित्र रहा जिन्होंने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और सड़क निर्माण में अपनी सारा जीवन झोंक दिया। जनसूत्रों की माने तो अभी उनके दोनों पुत्र उनके बताए हुए मार्गों का अनुसरण कर रहे हैं और लोगों को प्रत्येक सुविधा व लाभ दिलाने अपने स्तर पर कार्य करते रहे हैं।यह चित्र स्वर्गीय विष्णुचरण गुप्ता का है, जो पुसौर थाना क्षेत्र के प्रमुख ग्राम केनसरा के मालगुजार पुत्र थे। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपने जीवन में कई उल्लेखनीय कार्य किए। विष्णुचरण गुप्ता जी छाया चित्र सफेद कपड़ों में देखा जा सकता है, जिनके चेहरे पर एक गंभीर और विचारशील अभिव्यक्ति है। उनके बाल पीछे की ओर सजाए गए हैं और वे एक साधारण लेकिन सम्मानजनक तरीके से दिखाई देते हैं। यह चित्र उनके जीवन और कार्यों की याद दिलाता है और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करता है। विष्णुचरण गुप्ता की विरासत आज भी जीवित है और उनके कार्यों ने लोगों को प्रेरित किया है।

Goutam Panda

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EDITOR - CG LIVE NEWS

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