
योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ साथ देश के जन जन तक शासकीय सुविधा पहुछाने परिसीमन जरूरी, लंबे समय तक कांग्रेस ने रोका परिसीमन को, 1976 में इसे ऐसा कुचला गया कि पिछले 70 साल तक नहीं हो पाया परिसीमन, राजनीतिक पंडित भी कहते है देश के विकास में परिसीमन होगा कारगर ।
एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्राही ने महिला आरक्षण के लिए परिसीमन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महिला आरक्षण बिल पास किया गया है जिसमें 33 प्रतिशत महिला प्रत्याशियों को स्थान दिया जाएगा। पाणिग्राही ने कहा कि यह महिला आरक्षण बगैर परिसीमन के संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि 1976 में परिसीमन हुआ था लेकिन इसके बाद इमरजेंसी लगाते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अलोकतांत्रिक तरीके से इसमें बैंड लगा दी जिसके कारण आज 2026 की स्थिति में 70 साल तक परिसीमन कार्य रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि इन 70 सालों में देश की आबादी लगभग 3 गुना हो चुकी है लेकिन देश के सबसे बड़े महा पंचायत में जहां 543 सीटें ही हैं वहीं सभी प्रदेशों के विधान सभाओं में भी सीटों की संख्या यथावत है। ऐसे में यह तय है कि जनता को जो सुविधा और अधिकार मिलनी चाहिए वे उससे वंचित हैं। पाणिग्राही ने कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र के मोदी सरकार ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल को पास किया है ताकि महिलाओं को उनके अधिकार मिल सके और सीटों का इजाफा हो सके। सूत्रों के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार वर्तमान के लोक सभा एवं विधान सभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। ऐसे स्थिति में देश में सांसदों की संख्या 600 से अधिक और छत्तीसगढ़ में विधायकों की संख्या 120 के आसपास बताया जाता है। इसी तरह अन्य प्रदेशों में सीटों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। ज्ञात हो कि 1955 के आसपास तत्कालीन मध्यप्रदेश में पुसौर विधान सभा था जहां के विधायक सारंगढ़ राजा नरेश सिंह थे जो कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री भी थे। ऐसे में लोगों का यह कयास है कि परिसीमन में पुसौर विधानसभा बन सकता है। इस कार्यक्रम के दौरान पाणिग्राही ने महिला आरक्षण के लिए परिसीमन की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि यह देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
