
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर शासन भले ही पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता दिखा रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हितग्राहियों को अब भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शासन स्तर से स्वीकृत आवासों की सूची जारी की गई है, लेकिन इस सूची को लेकर ही कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि सूची में कई अपात्र लोगों के नाम भी शामिल हो गए हैं, वहीं कुछ ऐसे लाभार्थी भी हैं जिन्हें पहले ही पीएम आवास का लाभ मिल चुका है और उनका नाम दोबारा सूची में आ गया है।

इसी तरह का पुसौर जनपद के लारा ग्राम पंचायत से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां आवास की सूची में नाम दर्ज कराने के एवज में एक पंचायत पदाधिकारि द्वारा पैसों की मांग की जा रही है। इससे परेशान होकर 7 महिला हितग्राहियों ने एकजुट होकर जनपद पंचायत के सीईओ के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत किया है। आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि आवास सूची में नाम जोड़ने के लिए उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं। सभी 7 महिलाओं ने आवेदन पर हस्ताक्षर कर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले शासन द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वीकृत आवासों की सूची जारी कर उसे मुनादी के साथ पंचायत कार्यालय के सूचना पटल पर चस्पा करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन कई पंचायतों में इस प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। आरोप है कि कुछ जगहों पर सूची में फेरबदल कर अपने चहेतों का नाम जोड़ने का प्रयास किया गया।
पुसौर जनपद की कई पंचायतों में आवास वितरण को लेकर असंतोष है। जहां पंचायत स्तर पर आपसी तालमेल और “बैलेंस” बन गया वहां से शिकायतें सामने नहीं आईं, लेकिन हकीकत में पात्र हितग्राही अब भी सूची से बाहर हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए जनपद कार्यालय पुसौर की जांच टीम अब प्रत्येक पंचायत में पहुंचकर हितग्राहियों से बातचीत कर रही है और जमीनी हकीकत खंगालकर रिपोर्ट तैयार कर रही है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जांच टीम भी निष्पक्षता से काम न करके “बैलेंस” बनाने में लग गई तो पीएम आवास का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
फरियादी महिलाओं ने सीईओ से मांग की है कि दोषी पंचायत पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और आवास सूची का पारदर्शी तरीके से पुनः सत्यापन कराकर पात्र हितग्राहियों को ही लाभ दिया जाए, ताकि योजना का उद्देश्य सार्थक हो सके।
