
नगर पंचायत क्षेत्र में बोरोडिपा चौक से जीएडी कॉलोनी होते हुए भाठिया कॉलोनी तक बन रही सड़क आम लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। कुछ दिन पहले आनन फानन में मरम्मत की गई लेकिन फिर से ज्यो का त्यों हो गया है, लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क का ठेका किसी निर्माण एजेंसी को दिया गया है और पिछले कई महीनों से यहां काम चल रहा है।

सूत्रों के अनुसार इस सड़क के साथ-साथ दोनों ओर नाली निर्माण का काम भी कराया जा रहा है। इसी कारण मुख्य सड़क का काम धीमी गति से हो रहा है। आवागमन को सुचारू रखने के नाम पर सड़क पर मुरुम डाला जा रहा है, लेकिन बरसात शुरू होते ही वही मुरुम कीचड़ में बदल गया है। नतीजा यह हुआ कि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले सैकड़ों लोग परेशानी झेलने को मजबूर हैं।
इस मार्ग से जीएडी कॉलेज के लगभग 500 विद्यार्थी, जीएडी कॉलोनी और बोरोडिपा के रहवासी के साथ ही आसपास के गांवों से आने वाले राहगीर भी गुजरते हैं। कीचड़ और गड्ढों से भरी सड़क पर न दोपहिया सुरक्षित है और न चारपहिया। पिछले एक महीने से यहां न सुगम सड़क मिली है और न ही चलने लायक रास्ता।
बीते शुक्रवार को कॉलेज के एक प्राध्यापक की कार इसी कीचड़ में फंस गई थी, जिसे जेसीबी की मदद से बाहर निकाला गया। इसी तरह कई मोटरसाइकिल और साइकिल सवार भी फिसलकर गिर चुके हैं और कीचड़ से सनकर घर लौट रहे हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को तो इस रास्ते से निकलना और भी मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परेशानी निर्माण एजेंसी की लापरवाही से है या नगर पंचायत प्रबंधन की निगरानी में कमी के कारण, या फिर लगातार हो रही बरसात की वजह से – यह तो शासन ही तय करे। लेकिन इतना तय है कि सुगम सड़क, पानी और स्वच्छता हर नागरिक का अधिकार है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अगर लोगों को मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़े तो यह चिंता का विषय है।
राहगीरों और विद्यार्थियों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, सड़क पर तुरंत मुरुम-गिट्टी डालकर आवागमन लायक बनाया जाए और निर्माण कार्य में तेजी लाकर जल्द से जल्द सड़क पूरी की जाए, ताकि रोज होने वाली दुर्घटनाओं और परेशानियों से राहत मिल सके।
