
3800 MW होगा प्लांट, ग्रामीण बोले – पहले पुरानी समस्याओं का समाधान करो

रायगढ़, 08 जुलाई 2026 | CG Live News
अदाणी पावर लिमिटेड, रायगढ़ द्वारा अपने ताप विद्युत संयंत्र की क्षमता में 1600 मेगावाट का विस्तार करने का प्रस्ताव लाया गया है। कंपनी का दावा है कि इससे राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
पर्यावरणीय क्लियरेंस के लिए होने वाले जनसुनवाई में आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने प्रदूषण, राखड़ निपटान और विस्थापन को लेकर कड़े सवाल उठाकर प्रबंधन को घेरने की तैयारी .
क्या है पूरा प्रस्ताव
वर्तमान में रायगढ़ प्लांट में 2200 MW + 1600 MW की इकाइयां संचालित हैं। कंपनी अब इसे बढ़ाकर कुल 3800 MW करना चाहती है। इसके लिए लगभग 185 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता बताई जा रही है, जिसमें 6.67 हेक्टेयर वन भूमि भी शामिल है।
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि अत्याधुनिक तकनीक से नए प्लांट में प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानकों का पालन किया जाएगा।
जनसुनवाई में गूंज सकते हैं सवाल
जनसुनवाई में बरपाली, तिलगी, रुचिदा, सरवानी सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। उन्होंने 3 मुख्य मुद्दे उठाए जाने की तैयारी:
कोट 1 – राखड़ पर सवाल
“अभी रोज 2.66 मिलियन टन राख निकल रही है। 82 एकड़ का राखड़ डंप पहले से भरा पड़ा है। नए विस्तार के बाद अतिरिक्त राख कहां जाएगी? हमारी जमीन और पानी पहले ही खराब हो रहा है।” – स्थानीय ग्रामीण
कोट 2 – विस्थापन पर नाराजगी
“पहले चरण में 100 से ज्यादा परिवार विस्थापित हुए थे। आज तक उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला। नई जमीन लेने से पहले पुराने वादे पूरे किए जाएं।” – प्रभावित ग्रामीण
कोट 3 – प्रदूषण की चिंता
“राख उड़ने से सांस और त्वचा की बीमारी बढ़ गई है। खेती चौपट हो गई है। पहले धूल और प्रदूषण बंद करो, फिर विस्तार की बात करो।” – महिला ग्रामीण
ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा “पहले पुराने वादे पूरे करो, फिर नए विस्तार की बात करो”।
कंपनी और प्रशासन का पक्ष
सूत्र बताते हैं कि जनसुनवाई में सहमति बनती है तो कंपनी के विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। CSR के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क पर काम किया जाएगा।
पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि होने वाले जनसुनवाई में उठाए गए सभी बिंदुओं को रिपोर्ट में दर्ज कर पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जाएगा। उसी के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
आगे की राह
यह प्रस्ताव अभी केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय के पास विचाराधीन है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक राखड़ निपटान और विस्थापितों के पुनर्वास का ठोस प्लान नहीं बनता, तब तक मंजूरी मिलना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
