संभागायुक्त कार्यालय बिलासपुर बना रेशम विभाग रायगढ़ की ढाल, 1.80 करोड़ की जांच 6 माह से लटकी, CM हाउस पहुंची शिकायत

            बिलासपुर, 13 अप्रैल 2026 – संभागायुक्त कार्यालय बिलासपुर पर रेशम विभाग रायगढ़ को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 80 लाख 27 हजार 431 रुपए की लागत से स्वीकृत कार्यों में वित्तीय अनियमितता की जांच 6 माह से लटकी हुई है। अब मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है।

उप संचालक रेशम कार्यालय

क्या है पूरा मामला
आयुक्त कार्यालय बिलासपुर संभाग को 10 सितंबर 2025 को पत्र क्रमांक 7602 के माध्यम से जांच अनुरोध भेजा गया था। पत्र में बताया गया कि उप संचालक रेशम रायगढ़ द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभागीय योजनाओं के नाम पर 1.80 करोड़ से अधिक के कार्यों में भारी गड़बड़ी की गई है। शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत 12 हजार रुपए की जानकारी हासिल कर जांच की मांग की थी।

रैली-कोसा खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा
सबसे ज्यादा अनियमितता रैली-कोसा की खरीदी में सामने आई है। आरोप है कि व्यापारियों से ग्रेड-2 और ग्रेड-3 का रैली-कोसा, ग्रेड-1 की दर पर खरीदा गया। गुणवत्ता परीक्षण प्रमाण पत्र कमीशन के लालच में जारी किए गए। कोसा संग्राहक परिवारों से भी छल किया गया। स्वस्थ डिम्ब समूह का कोसाफल लेकर निम्न ग्रेड का आंकलन कर भुगतान किया गया। देयक व्हाउचर देते समय समूहों के नाम वाले हिस्से को छिपाकर सत्यप्रतिलिपि दी गई। इसमें 11 लाख 480 रुपए से अधिक का भुगतान दर्ज है।

केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में बंदरबाट
केंद्रीय सिल्क समग्र-2 योजना के तहत रेशम विस्तार कृषकों को पौधरोपण, सिंचाई सुविधा, कृमिपालन भवन, उपकरण के लिए 87 लाख 30 हजार रुपए का अनुदान दिया गया। आरोप है कि इस अनुदान राशि का बंदरबाट किया गया। हितग्राहियों के भौतिक सत्यापन की मांग की गई है।

समूहों के नाम पर फर्जी भुगतान
स्व सहायता समूह छाल, पीपीसी कनकबीरा नरकालो, स्वावलंबन समूह सिंघारी, मलबरी प्रक्षेत्र, कोसा पौधरोपित प्रक्षेत्र में कराए गए कार्यों के भुगतान में भी फर्जीवाड़े की शिकायत है। स्ट्रेंच एवं कांटेदार घेराव, अग्निरोधक पट्टी, साफ-सफाई, गोबर-रासायनिक खाद डालने, निदाई-गुड़ाई के नाम पर 41 लाख 33 हजार 552 रुपए का भुगतान हुआ। जनवरी से मई तक सूखे के मौसम में भी अनावश्यक घास की छिलाई और साफ-सफाई के नाम पर लाखों का भुगतान दिखाया गया। फर्जी श्रमिकों से कार्य कराने की आशंका जताई गई है।

CM हाउस पहुंची शिकायत
अब यह पूरा मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गया है। 9 अप्रैल को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अंतर्विभागीय राज्य स्तरीय टीम गठित कर कार्रवाई की मांग की गई है। ताकि शासन की जीरो टॉलरेंस नीति पर जनता का भरोसा बना रहे।

इसके अलावा आकस्मिकता देयकों के नाम पर 1 लाख 64 हजार 354 रुपए और खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को 17 लाख 98 हजार 565 रुपए के भुगतान पर भी सवाल उठे हैं।

6 माह से नहीं हुई कार्रवाई
शिकायतकर्ता ने संभाग स्तरीय जांच दल गठित कर 30 दिन में जांच की मांग की थी। लेकिन 6 माह बीतने के बाद भी आयुक्त कार्यालय से जांच आदेश तक की प्रतिलिपि नहीं मिली। इससे साफ जाहिर है कि जिम्मेदारों को बचाने के लिए संरक्षण दिया जा रहा है।

शिकायत की प्रतिलिपि ग्रामोद्योग विभाग मंत्रालय और कलेक्टर रायगढ़ को भी दी गई थी, फिर भी जांच की अनदेखी की गई।

अब सबकी निगाहें CM हाउस पर टिकी हैं कि कब दोषियों पर गाज गिरती है और ये सवाल भी उठ रहे हैं:

  • जांच 6 महीने से क्यों लटकी है?
    10 सितंबर 2025 को शिकायत के बाद भी संभागायुक्त कार्यालय बिलासपुर ने जांच आदेश तक जारी क्यों नहीं किया?
  • किसे बचाने के लिए फाइल दबाई गई?
    जब RTI से 12 हजार की पुख्ता जानकारी मिली है, तो कार्रवाई में देरी संरक्षण नहीं तो और क्या है?
  • ग्रेड-3 का कोसा, ग्रेड-1 के रेट पर कैसे खरीदा गया?
    गुणवत्ता परीक्षण प्रमाण पत्र किसके इशारे पर और कितने कमीशन में जारी हुए?
  • कोसा संग्राहक परिवारों से छल किसने किया?
    स्वस्थ डिम्ब समूह का कोसाफल लेकर निम्न ग्रेड का भुगतान क्यों किया गया? 11 लाख के व्हाउचर में नाम क्यों छिपाए गए?
  • 87 लाख के अनुदान का बंदरबाट कैसे हुआ?
    केंद्रीय सिल्क समग्र-2 योजना के तहत मिले पैसों का हितग्राहियों तक पूरा लाभ पहुंचा या नहीं, इसका भौतिक सत्यापन कब होगा?
  • सूखे में घास छिलाई के बिल कैसे पास हुए?
    जनवरी से मई तक सूखे के मौसम में भी लाखों की सफाई, घास कटाई के नाम पर 41 लाख से ज्यादा का भुगतान किस आधार पर हुआ?
  • फर्जी श्रमिकों के खाते में पैसा किसने डाला?
    समूहों के भुगतान वाले देयकों में श्रमिकों की जांच क्यों नहीं की जा रही?
  • ग्रामोद्योग मंत्रालय और कलेक्टर रायगढ़ चुप क्यों हैं?
    शिकायत की कॉपी मिलने के बाद भी दोनों कार्यालयों ने जांच की अनदेखी क्यों की?
  • CM हाउस की जीरो टॉलरेंस नीति कब दिखेगी?
    9 अप्रैल को शिकायत के बाद अब तक राज्य स्तरीय टीम का गठन क्यों नहीं हुआ?
  • क्या बिलासपुर कमिश्नर ऑफिस भ्रष्ट अफसरों की ढाल बन गया है?
    कार्रवाई के बजाय 6 महीने से चुप्पी, क्या ये मिलीभगत का सबूत नहीं है?
Goutam Panda

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EDITOR - CG LIVE NEWS

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