

रायगढ़ । जिले में एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसानों के सत्यापन के दौरान चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। जिले के 41 हजार 652 किसान गायब बताए जा रहे हैं। इन किसानों को ढूंढने के लिए कृषि सहित अन्य विभाग के अधिकारी गांव-गांव, गली-गली भटक रहे हैं। इस सूची में पुसौर तहसील तीसरे स्थान पर है। पुसौर तहसील में 8 हजार 268 किसानों को पलायन की श्रेणी में रखा गया है।
सबसे ज्यादा रायगढ़ और तमनार में, पुसौर तीसरे पर*
जानकारी अनुसार सबसे ज्यादा रायगढ़ तहसील में 12,045 और उसके बाद तमनार में 8,791 किसान पलायन सूची में हैं। पुसौर के बाद चौथे नंबर पर खरसिया 4,581 और पांचवे पर घरघोड़ा 2,735 किसान हैं।
बाहरी लोगों ने खरीदी जमीन, मौके पर कोई नहीं*
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पुसौर में पलायन का एक बड़ा कारण बाहरी लोगों द्वारा कृषि भूमि की खरीदी है। सत्यापन के लिए जब अधिकारी खेतों और घरों में पहुंच रहे हैं तो मौके पर कोई किसान नहीं मिल रहा है। जमीन तो खरीदी जा चुकी है लेकिन विक्रेता का पता नहीं है। इसी कारण इनका नाम अभी पलायन सूची में डाल दिया गया है।

संयुक्त खाते और मोबाइल नंबर बनी सबसे बड़ी बाधा*
अधिकारियों के मुताबिक पंजीयन में सबसे बड़ी समस्या संयुक्त खातों को लेकर आ रही है। एक खाते में 8 लोगों का नाम होने पर सभी का सत्यापन जरूरी है। साथ ही कई किसानों के पास मोबाइल नंबर ही नहीं है। इसके अलावा जिले में 13,407 खसरे डायवर्टेड हैं और 1,478 जमीन विवादित श्रेणी में हैं। 11,149 किसानों की मौत भी हो चुकी है लेकिन नाम नहीं कटे हैं।
गांव-गांव में लग रहे शिविर*
इस संबंध में तहसीलदार सुश्री अनुराधा पटेल से संपर्क नहीं हो पाया। वहीं कृषि विकास अधिकारी श्री रोहित पटेल ने बताया कि _”इसके लिए प्रत्येक गांवों में शिविर का आयोजन किए जा रहे हैं, ताकि किसान आकर अपना पंजीयन करा सकें और पलायन सूची से नाम हट सके।”
क्या है स्थिति*
जिले में कुल 3 लाख 23 हजार 489 किसान हैं। इनमें से अभी तक सिर्फ 1 लाख 35 हजार 876 किसानों का ही एग्रीस्टेक में पंजीयन हो पाया है। मतलब अभी भी 58 फीसदी यानी 1.87 लाख किसानों का पंजीयन बाकी है। इसलिए कृषि विभाग के अधिकारी अब -घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं ताकि पात्र किसानों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके।


