

रायपुर, जुलाई 2026 । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। CAG यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के 5 जिलों में गुणवत्ता जांच और परीक्षण किए बिना ही करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए।

रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 से 2021-22 तक के दौरान इन जिलों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पाइपलाइन बिछाने, टंकी निर्माण और अन्य कार्यों पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन काम की गुणवत्ता परखने के लिए न तो पानी के नमूने की जांच हुई और न ही निर्माण सामग्री की टेस्टिंग कराई गई।
नहीं हुई पानी और सामग्री की जांच
CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मिशन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक हर स्तर पर पानी की गुणवत्ता, पाइप और निर्माण सामग्री की जांच अनिवार्य है। लेकिन संबंधित एजेंसियों ने इस नियम को दरकिनार कर दिया। नतीजतन घटिया सामग्री लगने और दूषित पानी की सप्लाई का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जिन गांवों में नल जल योजना के तहत काम हुआ, वहां भी पानी की शुद्धता की जांच नहीं की गई। अधिकारियों ने सिर्फ कागजों पर काम पूरा दिखा दिया।
विभाग ने दी सफाई
इस मामले में जल जीवन मिशन के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल और स्टाफ की कमी के कारण जांच नहीं हो पाई। हालांकि CAG ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि जनस्वास्थ्य से जुड़ी योजना में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांच के सप्लाई किया गया पानी लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। पाइप और टंकी की गुणवत्ता सही नहीं होने से योजना लंबे समय तक नहीं चल पाएगी।CAG ने राज्य सरकार को सिफारिश की है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में सभी कार्यों की थर्ड-पार्टी जांच अनिवार्य की जाए। साथ ही पहले से हुए कामों की भी गुणवत्ता जांच कराई जाए।
