

एनटीपीसी और ग्रामवासियों ने मिलकर खींचा प्रभु जगन्नाथ का भक्ति, आस्था और समरसता का अद्भुत संगम
लारा, जुलाई 2026 । “नाहं वैकुण्ठे वसामि न योगिनां हृदये, यत्र गायन्ति मद्भक्ता तत्र तिष्ठामि नारद” – प्रभु जगन्नाथ के इस वचन को एनटीपीसी लारा ने चरितार्थ कर दिखाया। भगवान के सार्वभौमिक संदेश “सब मनिसा मोर परजा” अर्थात “सभी मनुष्य मेरी संतान हैं” को आत्मसात करते हुए यहां बहुदा रथयात्रा का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

इस पावन अवसर पर पूरा परिसर “जय जगन्नाथ, जय बलभद्र, जय सुभद्रा माई” के जयघोष से गूंज उठा। एनटीपीसी परिवार, प्रेरिता महिला समिति, सीआईएसएफ के जवान, टाउनशिपवासी और आसपास के दर्जनों गांवों के श्रद्धालु एक ही कतार में, एक ही भाव से रथ की रस्सी खींचते नजर आए। मानो प्रभु ने सभी भेद मिटाकर सबको अपनी प्रजा मानकर एक सूत्र में बांध दिया हो।
वैदिक मंत्रों और शंखनाद से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः काल भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना से हुआ। पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप और पुष्प अर्पण के साथ माहौल भक्तिमय हो गया। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं ने प्रभु से विश्व शांति, सुख-समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की।
कीर्तन और भजनों के साथ निकली दिव्य रथयात्रा
पूजा के बाद भक्तों ने फूलों और रंगीन झालरों से सजे रथ को मंदिर से बाहर लाया। जैसे ही रथ आगे बढ़ा, महिलाओं के मुख से मंगल गीत और भजन फूट पड़े। ढोल-मंजीरे, शंख और झांझ की मधुर ध्वनि से सम्पूर्ण वातावरण कृष्णमय हो गया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने प्रभु के रथ पर पुष्प वर्षा कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।एनटीपीसी के अधिकारी हों या खेत में काम करने वाला किसान, सब एक साथ “जय जगन्नाथ” कहते हुए रथ को खींच रहे थे। यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। लगा जैसे त्रेतायुग की वह लीला फिर से जीवंत हो गई हो जहां प्रभु अपने भक्तों के साथ बिना भेदभाव चलते हैं।
प्रभु का संदेश बना प्रेरणा
बहुदा रथयात्रा भगवान जगन्नाथ की वापसी का प्रतीक ही नहीं, बल्कि मानवता का संदेश भी है। प्रभु का यह कहना कि “सब मनिसा मोर परजा” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इस आयोजन ने सिखाया कि जात-पात, ऊंच-नीच से ऊपर उठकर जब हम एक साथ ईश्वर की शरण में जाते हैं, तभी सच्ची समरसता जन्म लेती है।
एनटीपीसी लारा प्रमुख श्री ठाकुर ने कहा, “प्रभु जगन्नाथ हम सबके स्वामी हैं। आज जब उद्योग और गांव के लोग एक साथ रथ खींच रहे थे, तो लगा कि प्रभु ने हमें एक परिवार बना दिया है।”
भोग और प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन
यात्रा के समापन पर भगवान को 56 भोग अर्पित किया गया। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरित किया गया। उपस्थित जनों ने प्रभु से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।इस दिव्य आयोजन को सफल बनाने में एनटीपीसी प्रबंधन, प्रेरिता महिला समिति, सीआईएसएफ और स्थानीय भक्तों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
