

रायगढ़ । स्वास्थ्य केवल अस्पतालों से नहीं बदलता, बल्कि तब बदलता है जब स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। जब CSR केवल परियोजना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन का हिस्सा बन जाए, तब असली बदलाव दिखता है। रायगढ़ और सक्ती जिले के अनेक गाँवों में कुछ वर्ष पहले तक यही स्थिति थी। साधारण बीमारी के लिए भी कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी। गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों का पोषण, बुजुर्गों का उपचार और किशोरियों के लिए स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएँ बड़ी चुनौती थीं। इसी पृष्ठभूमि में NTPC लारा ने स्वास्थ्य को केवल इलाज तक सीमित न रखकर सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन से जोड़ने का निर्णय लिया। आज यही सोच आसपास के गाँवों में सामाजिक परिवर्तन की कहानी बन चुकी है।
1. जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं को मिला स्थायी पता
किसी क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत संस्थानों से शुरू होती है। इसी उद्देश्य से NTPC लारा ने छपोरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र PHC और पुसौर में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र CHC के निर्माण में सहयोग किया। इन केन्द्रों से ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने लगा और शहरों पर निर्भरता कम हुई। साथ ही शहीद लखीराम अग्रवाल शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रायगढ़ को वित्तीय सहयोग देकर क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा शिक्षा और सेवाओं को सुदृढ़ किया गया।

2. जब अस्पताल खुद गाँव-गाँव पहुँचा
केवल अस्पताल बनाना पर्याप्त नहीं था। इसलिए मोबाइल मेडिकल वैन-कम-हेल्थ क्लिनिक शुरू की गई। यह वैन आज रायगढ़ और सक्ती के 26 गाँवों में नियमित रूप से पहुँचकर डॉक्टर की सलाह, स्वास्थ्य परीक्षण, दवाइयाँ और प्राथमिक उपचार दे रही है। दूरदराज के लोगों के लिए यह “चलता-फिरता अस्पताल” बन गई है।

3. दो जिंदगियों की एक साथ सुरक्षा
NTPC लारा ने गर्भवती और धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी। आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से नियमित जांच, पोषण परामर्श और दवाइयाँ दी जा रही हैं। उद्देश्य सिर्फ सुरक्षित मातृत्व नहीं, बल्कि हर बच्चे को स्वस्थ जीवन की शुरुआत देना है।
4. छिपी हुई भूख के खिलाफ लड़ाई
स्वास्थ्य थाली से भी तय होता है। NTPC लारा ने मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के लिए 2 करोड़ रुपये का सहयोग दिया, ताकि कुपोषित बच्चों को बेहतर पोषण मिले। प्रधानमंत्री TB मुक्त भारत अभियान के तहत 80 से अधिक TB मरीजों को पोषण सहायता भी दी गई।
5. एक शौचालय… सम्मान की ओर कदम
स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए 1,637 व्यक्तिगत घरेलू शौचालय और कम्युनिटी टॉयलेट्स के निर्माण में सहयोग किया गया। इससे महिलाओं और बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन मिला। स्वच्छता से जलजनित बीमारियाँ भी कम हुईं।
6. जब बेटियों के लिए स्कूल सुरक्षित बना
महलोई, झिलगिटार, लारा और पुसौर के स्कूलों में बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय बनवाए गए। इससे छात्राओं की उपस्थिति बढ़ी और उन्हें सुरक्षित माहौल मिला।
7. रोकथाम पर जोर
नियमित स्वास्थ्य शिविर, स्कूल हेल्थ चेक-अप, नेत्र और दंत परीक्षण शिविर लगाकर बीमारियों की समय पर पहचान की जा रही है। कई ग्रामीणों को पहली बार विशेषज्ञ डॉक्टरों से निःशुल्क परामर्श मिला।
8. महिलाओं के स्वास्थ्य पर टूटी चुप्पी
मासिक धर्म स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम, संवाद और सैनिटरी सामग्री वितरण कर किशोरियों और महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।
यदि इन पहलों को अलग-अलग देखें तो ये सामान्य CSR कार्य लगते हैं। लेकिन एक साथ देखने पर पता चलता है कि NTPC लारा ने इलाज, पोषण, स्वच्छता, जागरूकता और सम्मान को जोड़कर ग्रामीण विकास का समग्र मॉडल तैयार किया है।
आज गाँवों की माताएँ सुरक्षित हैं, बच्चे बेहतर पोषण पा रहे हैं, बेटियाँ आत्मविश्वास से स्कूल जा रही हैं और स्वास्थ्य सेवाएँ अब दूर का सपना नहीं, जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। यही NTPC लारा की CSR यात्रा का सार है – बदलाव हमेशा बड़े एलान से नहीं, छोटे-छोटे निरंतर कदमों से आता है।
