
नगर पंचायत पुसौर में सनातनी परंपराओं और आस्था का संगम एक बार फिर देखने को मिला। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के बाद छठी के दिन ओडिया समुदाय की प्राचीन परंपरा “दहीकादो” बड़े श्रद्धा भाव से मनाई गई। इसके बाद मंदिर चौक परिसर में पारंपरिक मटका फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ढोल-नगाड़े, जयकारों और गुलाबी तिलक से पूरा नगर कृष्णमय हो उठा।

पुसौर में पिछले कई वर्षों से जन्माष्टमी के बाद दहीकादो की परंपरा निभाई जा रही है। इस परंपरा के तहत दहीकादो टीम विशेष गुलाबी घोल और “ढुढी” नामक प्रसाद तैयार करती है। ढुढी शुद्ध आटे और देशी घी से बनाई जाती है। टीम गुलाबी तिलक और प्रसाद लेकर नगर की गलियों में भजन और हाना गाते हुए निकलती है।
इस दौरान टीम श्रद्धालुओं और बाल गोपालों के माथे पर तिलक लगाकर ढुढी प्रसाद का वितरण करती है। जिन घरों में छोटे बच्चे होते हैं, वहां टीम को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है। टीम वहां जाकर घर की सुख-शांति और बच्चे की दीर्घायु की कामना करती है। वहां मिले प्रसाद को सभी आपस में बांटकर ग्रहण करते हैं।
इस वर्ष दहीकादो की शुरुआत भगवान जगन्नाथ मंदिर में पूजा-पाठ और प्रसाद निर्माण के साथ हुई। इस अवसर पर नगर पंचायत के उपाध्यक्ष उमेश साव भी उपस्थित रहे और उन्होंने पूजा में भाग लिया। दहीकादो टीम में वरिष्ठ प्रमुख वादक पलऊ यादव, संकरी गुप्ता, अंतर्यामी महाणा, पदमुख महाणा, सुरेश महाणा, नारायण साव, सुभाष यादव, सहदेव साव, जितेंद्र महाणा, राघव साव, भुरू सौरा, अलेख साव, तरुण साव, चैतराम गुप्ता, विजय महाणा, बैकुंठ गुप्ता, राजेश साव, भोजराम मेहर सहित अन्य सहयोगी शामिल हैं। यह टीम पिछले तीन दिनों से कार्यक्रम की तैयारियों में जुटी थी।
क्या है दहीकादो?
उड़िया भाषा में “दहीकादो” का शाब्दिक अर्थ “दही से लिपाई कर पवित्र करना” होता है। मान्यता है कि दही पवित्रता और शीतलता का प्रतीक है। पहले जब गांवों में कच्ची सड़कें और चारों ओर कीचड़ होता था, तब भी दहीकादो की टीम बाजा-गाजा के साथ हर गली में जाकर तिलक और प्रसाद बांटती थी। इसी आस्था से यह परंपरा “दहीकादो” के नाम से प्रसिद्ध हुई। जानकारों के अनुसार गुलाबी तिलक बनाने में भी दही का उपयोग किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से भगवान कृष्ण के छठी के दिन मंदिर चौक में मटका फोड़ उत्सव भी आयोजित किया जा रहा है। यह उत्सव पोला अमावस्या के दिन मनाया जाता है और इसमें नगर के युवाओं को अपनी शक्ति और कौशल दिखाने का अवसर मिलता है। इस बार मटका फोड़ प्रतियोगिता में 25 से अधिक युवाओं ने भाग लिया। आयोजकों ने चुनौती बढ़ाने के लिए लोहे के खंभे पर मटकी बांधकर उस पर ग्रीस ऑयल लगा दिया था। कई प्रयासों के बाद विकास सौरा ने मटकी फोड़कर बाजी मारी।
विजेता विकास सौरा को नगर पंचायत उपाध्यक्ष उमेश साव ने नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मटकी फूटते ही उसमें से दही की बौछार हुई और पूरा मैदान “गोविंदा-गोविंदा” के नारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि दहीकादो और मटका फोड़ जैसी परंपराएं हमें अपनी संस्कृति से जोड़ती हैं और समाज में भाईचारा बढ़ाती हैं। आयोजकों ने अगले वर्ष और बड़े स्तर पर आयोजन का संकल्प लिया।


