
रायगढ़ : शासन की करोड़ों की लागत से बनी सरकारी इमारतें पहली ही बारिश में पानी टपकने और गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में आ गई हैं। ऐसा ही मामला रेंगालपाली के नव निर्मित स्कूल भवन का सामने आया है, जहां 1.21 करोड़ की लागत से बना भवन बरसात शुरू होते ही टपकने लगा।
क्या है पूरा मामला*
जानकारी के अनुसार रेंगालपाली में 8 महीने पहले 1.21 करोड़ की लागत से स्कूल भवन का लोकार्पण किया गया था। गुणात्मक निर्माण के कारण दीवारों में दरार आ गई है और कक्षों में छत से पानी टपक रहा है। जिससे क्लासरूम व लैब में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
पुसौर विकासखंड अंतर्गत शासकीय ग्राम रें

गालपाली में दिसंबर 2025 में लोकार्पित इस शाला भवन में पहली ही बरसात के दौरान कई कमजोरियां उजागर हुई हैं। दीवारें, दरारें आने और जगह-जगह प्लास्टर की परतें निकलने से शिक्षक और छात्र डरे हुए हैं। करीब 14 कमरों वाले इस भवन में विद्यार्थियों और शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी। विद्यालय में पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, प्रयोगशाला और कक्षाओं के लिए अलग-अलग कमरे बनाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि 150 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई जा रही है।
क्या कहते है खंड शिक्षा अधिकारी
इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी भुवनेश्वर पटेल ने बताया कि उक्त भवन *पीडब्ल्यूडी विभाग रायगढ़* द्वारा निर्मित कराया गया है। भवन में पानी टपकने और दीवारों में दरार की सूचना मिलते ही इसकी जानकारी विभाग को दे दी गई है। विभाग द्वारा निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराई जाएगी।उन्होंने आश्वस्त किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और विभाग इस पर गंभीरता से काम कर रहा है।
ज्ञात हो कि “सामान्यतः निजी मकान/भवन में ऐसी स्थिति कभी निर्मित नहीं होती, लेकिन सरकारी भवनों में कई बार निर्माण एजेंसी और रखरखाव को लेकर ऐसी दिक्कतें सामने आ जाती हैं जो निर्माण एजेंसी के करगुजारी पर सवाल खड़े करते हैं
शिक्षा विभाग ने मांगी रिपोर्ट
शिक्षा विभाग ने जांच के निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारियों से स्कूल भवन की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्माण में कोई खामी पाई जाती है तो ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी।अभिभावकों में चिंता
अभिभावकों का कहना है कि नए भवन में पढ़ाई के लिए बच्चों को भेजा था, लेकिन अब छत टपकने और दरारों के कारण डर लग रहा है। उन्होंने मांग की है कि मानसून से पहले भवन की मरम्मत कराई जाए। उल्लेखनीय है कि 1.21 करोड़ की लागत से बना यह भवन शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल बनने के बजाय गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि पीडब्ल्यूडी विभाग और शिक्षा विभाग मिलकर कितनी जल्दी इस समस्या का समाधान करते हैं।


