

महानदी में बाढ़ की आपदा से निपटने के लिए पडिगांव में बनाया जा रहा बाढ़ राहत भवन निर्माण की धीमी गति और गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। नवंबर 2025 में शुरू हुए इस भवन का 40% भुगतान हो चुका है, लेकिन धरातल पर काम महज 20% ही दिख रहा है। जून 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य तय था, पर मौजूदा रफ्तार देखकर लगता है कि बाढ़ आने से पहले भवन तैयार नहीं हो पाएगा।
30 लाख की स्वीकृति, पर काम कछुआ चाल
सूत्रों के अनुसार, महानदी में बाढ़ आने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शासन ने पडिगांव में बाढ़ राहत भवन के लिए 30 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। जगह चयन को लेकर विवाद के कारण निर्माण देर से नवंबर 2025 में शुरू हो पाया। अब जून 2026 आ गया है, 40% राशि आहरित हो चुकी है, फिर भी भवन छत स्तर तक नहीं पहुंच सका है।
गुणवत्ता पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय जानकारों का आरोप है कि काम धीमा होने के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। लगभग 2400 वर्गफीट में बन रहे इस भवन में एक ढलाई पूरी हुई है। दूसरे हिस्से में टीन शेड लगाया जाएगा। भवन में महिला-पुरुष के लिए अलग-अलग टॉयलेट की सुविधा भी प्रस्तावित है। सब इंजीनियर राखी पटेल इसके मॉनिटरिंग प्रभारी हैं।
शासन की मंशा पर पानी फिरने का डर
इस भवन को बनाने के पीछे शासन की मंशा साफ थी कि 2026 की मानसून में अगर बाढ़ आती है तो प्रभावित परिवारों को पडिगांव में सुरक्षित ठहराया जा सके। लेकिन निर्माण की मौजूदा गति को देखते हुए ग्रामीणों को आशंका है कि समय पर भवन तैयार नहीं हो पाएगा। बाढ़ आई और भवन अधूरा रहा, तो 30 लाख रुपये की स्वीकृति का मकसद ही फेल हो जाएगा।
पंचायत का पक्ष नहीं आया सामने
इस भवन का निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत पडिगांव है। निर्माण में आ रही परेशानी को लेकर पंचायत का पक्ष अभी सामने नहीं आ सका है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन निर्माण की गति बढ़ाए और गुणवत्ता की जांच कराए, ताकि बाढ़ के समय यह भवन सच में राहत बन सके, बोझ नहीं।
