
पुसौर ब्लॉक के गुडगहन में 196 परिवारों को मिली पानी की आजादी, यशोदा यादव जैसी सैकड़ों महिलाओं की दिनचर्या बदली, जलजनित बीमारियों में आयेगी कमी.

रायगढ़, 16 जून 2026। विकासखंड पुसौर के ग्राम पंचायत दर्रामुड़ा के आश्रित ग्राम गुडगहन में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। 196 परिवारों और 718 की आबादी वाले इस गांव में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद लोगों को पानी के संघर्ष से मुक्ति मिली है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता ने गांव में स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी है।
पहले घंटों लगते थे, अब पलभर में मिल रहा पानी
कुछ साल पहले तक गुडगहन में पानी के लिए हाहाकार की स्थिति थी। गांव में सीमित हैंडपंप और कुएं ही जल का सहारा थे। गर्मी में जलस्तर गिरते ही पानी के लिए लंबी कतारें लगती थीं। महिलाओं को सुबह 4 बजे उठकर पानी भरने जाना पड़ता था। कई बार बच्चे भी स्कूल छोड़कर पानी लाने में मदद करते थे। इससे पढ़ाई और सेहत दोनों प्रभावित हो रही थीं।
मिशन ने ऐसे बदली सूरत
जल जीवन मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाने, जल स्रोत विकसित करने और हर घर में नल कनेक्शन देने का काम तेजी से हुआ। आज स्थिति यह है कि गांव के हर घर में नियमित रूप से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है। पानी के लिए होने वाली भागदौड़ खत्म होने से ग्रामीणों की पूरी दिनचर्या बदल गई है।
यशोदा यादव की कहानी: पानी से मिली आत्मनिर्भरता
गुडगहन निवासी श्रीमती यशोदा यादव की जिंदगी इस योजना का सबसे बड़ा उदाहरण है। पहले उनका आधा दिन पानी की जुगाड़ में निकल जाता था। घर के काम के साथ पानी भरना सबसे बड़ी चुनौती थी। यशोदा बताती हैं कि अब नल से घर में ही पानी आने से उनकी सबसे बड़ी टेंशन खत्म हो गई है। समय बचने से वे घर का काम समय पर निपटा लेती हैं और परिवार को ज्यादा वक्त दे पाती हैं। बचे समय का सदुपयोग करते हुए वे अब स्व-सहायता समूह से जुड़ गई हैं। सिलाई और अन्य आय बढ़ाने वाले कामों से उनकी आमदनी बढ़ी है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
बीमारियां घटीं, बच्चे जाने लगे नियमित स्कूल
स्वच्छ पानी मिलने का सबसे बड़ा असर गांव के स्वास्थ्य पर पड़ा है। पहले दूषित पानी से बच्चों और बुजुर्गों में पेट दर्द, डायरिया, बुखार और स्किन की बीमारियां आम थीं। अब जलजनित रोगों में 80% से ज्यादा की कमी आई है। परिवारों का इलाज पर होने वाला खर्च घटा है। बच्चे अब पानी भरने के बजाय रोज स्कूल जा रहे हैं। उनकी उपस्थिति और पढ़ाई दोनों बेहतर हुई है।
गुडगहन बना प्रेरणा मॉडल
आज गुडगहन सिर्फ नल-जल वाला गांव नहीं रहा। यह स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण का मॉडल बन गया है। महिलाओं को पानी के बोझ से आजादी मिली तो वे आर्थिक गतिविधियों से जुड़ीं। गांव में साफ-सफाई बढ़ी है। यशोदा यादव जैसी सैकड़ों महिलाओं की कहानी बताती है कि जल जीवन मिशन केवल पाइपलाइन बिछाने की योजना नहीं है। यह ग्रामीण भारत को सम्मान, सुविधा, सेहत और आत्मनिर्भरता देने वाला अभियान है। गुडगहन की यह सफलता दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
