
सुरक्षित खनन और हरित सोच ने दिलाया कोयला मंत्रालय का सर्वोच्च सम्मान, सरगुजा का नाम राष्ट्रीय फलक पर चमका

यह सम्मान बीते 2 नवंबर को राजधानी रायपुर के मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित भव्य ‘स्टार रेटिंग अवार्ड समारोह-2026’ में प्रदान किया गया। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने यह पुरस्कार खदान प्रबंधन को सौंपा।
सिर्फ उत्पादन नहीं, जिम्मेदार खनन की मिसाल
पीईकेबी की यह सफलता महज कोयला उत्पादन का नतीजा नहीं है। यह सुरक्षित कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक पद्धति, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और स्थानीय समाज के प्रति दायित्व निभाने का प्रतिफल है। यही कारण है कि कोल कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन के स्वतंत्र विशेषज्ञों की कठोर जांच में यह खदान हर पैमाने पर खरी उतरी।
गौरतलब है कि इस वर्ष देशभर की कुल 50 खदानों को ही 5-स्टार का दर्जा मिल सका है। इनमें 15 भूमिगत और 35 ओपनकास्ट खदानें शामिल हैं। छत्तीसगढ़ से मात्र पांच खदानों का इस सूची में आना, राज्य के खनन क्षेत्र की बढ़ती साख को दर्शाता है।
राजस्थान की बिजली का आधार
पीईकेबी खदान का संचालन परसा केंटे कोलियरीज लिमिटेड कर रही है। यहां से निकलने वाला कोयला राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम की तापीय इकाइयों का प्रमुख ईंधन है। इस कोयले से राजस्थान की 4,340 मेगावाट क्षमता की बिजली इकाइयों को ऊर्जा मिलती है, जिससे लाखों घर रोशन होते हैं। माइन डेवलपर एवं ऑपरेटर के तौर पर अदाणी नेचुरल रिसोर्सेज द्वारा संचालित पीईकेबी के साथ ही गारे पेलमा सेक्टर-तीन खदान को भी इस बार 5-स्टार रेटिंग हासिल हुई है।
हरित खनन ही भविष्य
पीईकेबी में खनन के साथ-साथ भूमि पुनर्वास, हरित पट्टी के विस्तार और जैव विविधता को सहेजने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चल सकते हैं। निश्चित रूप से यह राष्ट्रीय सम्मान वहां काम करने वाले इंजीनियरों, श्रमिकों और प्रबंधन की मेहनत, अनुशासन और दूरदृष्टि का परिणाम है। पीईकेबी ने यह दिखा दिया है कि छत्तीसगढ़ अब केवल कोयला उत्पादक राज्य नहीं, बल्कि जिम्मेदार और सतत खनन का राष्ट्रीय मॉडल बन चुका है।
