
रायगढ़। सेठ किरोड़ीमल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रायगढ़ में आयोजित सांस्कृतिक संध्या एवं भूमिपूजन-शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के अधूरे गायन का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी के संज्ञान में आने पर मंच से ही पूरा वंदे मातरम् गायन करवाया गया।
इस गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, रायगढ़ द्वारा महाविद्यालय के प्राचार्य को कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक GENCOR-35/1250/2026-O/O ADD COLL RGH-2 जारी किया गया है।
नोटिस में क्या कहा गया है –
जारी नोटिस में कहा गया है कि दिनांक 02.11.2026 के कार्यक्रम में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं राज्यगीत को निर्धारित क्रम में नहीं रखा गया, जो अत्यंत खेदजनक है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा –
किरोड़ीमल महाविद्यालय के कार्यक्रम में वंदे मातरम् का अधूरा गायन हो रहा था, जिस पर संज्ञान लेते हुए वंदे मातरम् का पुनः गायन करवाया गया। संविधान के अनुच्छेद 51-क(क) और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के अनुसार राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राज्यगीत का गायन निर्धारित क्रम, आधिकारिक पाठ और संस्करण में ही होना चाहिए। यह राष्ट्र की गरिमा का विषय है, इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि राष्ट्र के सम्मान को ठेस पहुंचाने के समान है। सभी शासकीय संस्थानों से अपील है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचें और राष्ट्रीय प्रतीकों का पूरा सम्मान सुनिश्चित करें।
24 घंटे में जवाब का निर्देश –
कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में प्राचार्य को 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें कार्यक्रम प्रभारी एवं गायन संचालित करने वाले व्यक्तियों के नाम, पदनाम तथा प्रयुक्त क्रम-पाठ-संस्करण का विवरण मांगा गया है। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई कर कार्यालय को सूचित करने को कहा गया है। निर्धारित अवधि में उत्तर न मिलने पर एकपक्षीय निर्णय लेकर नियमानुसार विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
उल्लेखनीय है कि यह घटना केवल एक कार्यक्रम की चूक नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हमारे शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपेक्षित गंभीरता और तैयारी है? महाविद्यालय जैसे ज्ञान के मंदिर में यदि राष्ट्रगीत के क्रम में ही भूल हो जाए, तो यह व्यवस्था की लापरवाही को दर्शाता है। वहीं इस प्रकरण का सकारात्मक पक्ष यह भी है कि गलती को मंच पर ही सुधारा गया और प्रशासन ने उसे केवल भाषण तक सीमित न रखकर लिखित कार्रवाई का रूप दिया। अब आवश्यकता इस बात की है कि यह कार्रवाई केवल दंड तक सीमित न रहे, बल्कि सभी शासकीय संस्थानों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका बने – कि किसी भी कार्यक्रम से पहले राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राज्यगीत के सही क्रम, पाठ और प्रोटोकॉल की पूर्व जांच अनिवार्य हो। सम्मान केवल गायन में नहीं, तैयारी में भी दिखना चाहिए।
