

18 साल से वेतन में नहीं हुई अपेक्षित वृद्धि, पदोन्नति और सम्मान की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन.
पुसौर, रायगढ़। वेतन विसंगति, पदोन्नति में अनदेखी और पद के अनुरूप सम्मान नहीं मिलने से नाराज अडानी पावर प्लांट में कार्यरत कामगारों ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है। कामगार शांतिपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन पर उतर गए हैं। हड़ताल के दूसरे दिन गुरुवार को अडानी के मुख्य गेट के सामने धरने पर 110 कामगार बैठे रहे, जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार कंपनी में काम कर रहे कई कर्मचारियों को 18 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन उनके वेतन में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं हुई है। इसके कारण कामगारों के परिवार के भरण-पोषण और विकास में बाधा आ रही है। अधिकांश कामगार शुरू से ही इसी कंपनी के भरोसे हैं और आज उनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक हो चुकी है। ऐसे में उनके ऊपर स्वास्थ्य और परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं, जिसमें बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह जैसे महत्वपूर्ण खर्च भी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार इस प्लांट के लिए जिन किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था, उनमें से कुछ कामगारों की मृत्यु हो चुकी है। ऐसे मृतक कामगारों के परिवारजनों का भरण-पोषण ठीक से नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि कंपनी प्रबंधन द्वारा उनके परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई होती तो आज ऐसी स्थिति नहीं बनती। फिलहाल मृतक कामगारों के परिजन इस धरने में शामिल नहीं हैं, लेकिन चर्चा है कि आने वाले दिनों में वे भी इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।
धरना स्थल पर लगातार संख्या बढ़ने से प्रदर्शन स्थल छोटा पड़ रहा है। इसे देखते हुए पंडाल का विस्तार किया जा रहा है और बारिश के मौसम को देखते हुए उसे वाटरप्रूफ भी बनाया जा रहा है, ताकि आंदोलन लगातार जारी रह सके।
अब सवाल यह है कि इन प्रदर्शनकारियों को न्याय कब तक मिल पाएगा। कामगारों को आशा है कि अडानी एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी है और अपनी साख को लेकर हमेशा संवेदनशील रहती है, इसलिए उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा। कामगारों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।


