
दुकानदारों पर लग रहा पक्षपात का आरोप, खाद्य अधिकारी विक्रेता से दस्तावेज मंगाकर जनपद कार्यालय में जांच कार्य करते हैं पूरी, जनप्रतिनिधियों के खाद्य अधिकारी नहीं उठाते फोन, ब्लाक के लोग खाद्य विभाग का काम है कहकर मुह मोड़ देते हैं जिम्मेदारी से, अखिर वंचित जाए तो जाये कहाँ.

पुसौर जनपद क्षेत्र की शासकीय राशन दुकानों में केवल चावल वितरण में ही लापरवाही नहीं हो रही, बल्कि चीनी वितरण को लेकर भी भारी अनियमितता की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। पीडीएस दुकानों में हितग्राहियों को समय पर और पूरा राशन न मिलना अब आम बात हो गई है।
संपन्न वर्ग के लिए भले ही एक किलो चीनी की कीमत कोई मायने न रखती हो, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक किलो चीनी का मतलब पूरे महीने का हिसाब होता है। गरीब परिवार इसे बड़ी सहेज कर रखता है ताकि घर में कोई बीमार पड़ जाए या कोई मेहमान आ जाए तो काम आ सके। ऐसे में जब राशन दुकान से चीनी ही नहीं मिलती तो उनका बजट सीधे प्रभावित होता है।
जानकारी के अनुसार सरकारी दुकानों में चावल वितरण के बाद चीनी 20 रुपये किलो में दी जानी है। लेकिन अधिकांश दुकानदार हितग्राहियों को यह कहकर टाल देते हैं कि “इस माह तुम्हारी चीनी नहीं आई है”। जबकि दूसरे लोगों को चीनी दी जा रही होती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर “तुम्हारी चीनी” क्यों नहीं आती? क्या कोटे में भेदभाव हो रहा है या फिर चीनी को बाजार में खपाया जा रहा है।
नगर पंचायत पुसौर में 2 दुकानों के साथ पूरे ब्लाक में 90 से अधिक पीडीएस दुकानें संचालित हैं। इनमें से ज्यादातर दुकानों से चीनी वितरण को लेकर शिकायतें मिल रही हैं। हितग्राही चावल लेने तो आते हैं, लेकिन चीनी के नाम पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब यह पता चलता है कि कई हितग्राहियों ने अपने राशन कार्ड तक गिरवी रख दिए हैं। ऐसे में राशन लेने तो वही आते हैं, लेकिन असल में राशन कार्ड गिरवी रखने वाला व्यक्ति ही अनाज उठाकर ले जाता है। इससे जरूरतमंद हितग्राही अपने अधिकार से भी वंचित हो जा रहे हैं।
इन सभी तथ्यों को लेकर खाद्य विभाग से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन विभागीय अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका। लगातार हो रही शिकायतों के बाद अब स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी राशन दुकानों में चीनी वितरण की नियमित जांच की जाए, स्टॉक रजिस्टर का मिलान हो और दोषी दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों को उनका हक समय पर मिल सके।
