

मैदान बना खिलाड़ियों का ‘होम ग्राउंड’, महलोई की 3 बेटियों ने किया है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन
लारा/रायगढ़ @ http://cglivenews.in
खेल प्रतिभाओं को मंच देने और ग्रामीण अंचल के युवाओं में खेल भावना जगाने के उद्देश्य से एनटीपीसी लारा ने एक बार फिर बड़ी पहल की है। एनटीपीसी लारा की सीएसआर पहल के तहत चौथी राज्य स्तरीय लैक्रोस चैंपियनशिप का भव्य शुभारंभ शनिवार, 27 सितंबर को लारा टाउनशिप स्थित मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में हुआ।
प्रोजेक्ट हेड ने किया शुभारंभ
प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री सुभाष ठाकुर, परियोजना प्रमुख (HOP), एनटीपीसी लारा ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती रेखा ठाकुर, अध्यक्ष प्रगति महिला समिति मौजूद रहीं। कार्यक्रम में एनटीपीसी लारा के महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित रहे। शुभारंभ अवसर पर खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट कर अतिथियों का स्वागत किया और मैदान में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

लैक्रोस जैसे नए खेल को मिल रहा नया मुकाम
लैक्रोस अभी छत्तीसगढ़ में अपेक्षाकृत नया खेल है, लेकिन रायगढ़ अंचल में इस खेल ने तेजी से अपनी पहचान बनाई है। इसमें एनटीपीसी लारा के खेल मैदान की बड़ी भूमिका है। यहां उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं, कोचिंग और नियमित अभ्यास का मौका मिलने से यह मैदान अब स्थानीय खिलाड़ियों के लिए ‘होम ग्राउंड’ बन गया है। यहीं पर अभ्यास कर खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं।
महलोई की तीन बेटियों ने रचा इतिहास
इस क्षेत्र के लिए गौरव की बात यह है कि महोई क्षेत्र की तीन बेटियों ने लैक्रोस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद इन बेटियों ने अपनी मेहनत और लगन से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया है। वहीं, स्थानीय खिलाड़ी शिवम गवेल ने भी लैक्रोस में शानदार प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ये सभी खिलाड़ी एनटीपीसी लारा के मैदान में ही नियमित अभ्यास करते हैं।
CSR से मिल रहा खिलाड़ियों को संबल

एनटीपीसी लारा सिर्फ बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि सामुदायिक विकास के लिए भी लगातार काम कर रहा है। CSR के माध्यम से कंपनी खिलाड़ियों को किट, यात्रा भत्ता, प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के आयोजन में सहयोग प्रदान कर रही है। कंपनी का उद्देश्य सिर्फ टूर्नामेंट कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र की छिपी हुई प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है। इस राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है। प्रतियोगिता से खिलाड़ियों को न सिर्फ अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है, बल्कि अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता भी विकसित हो रही है।


