
आरटीआई से खुलासा, हस्ताक्षर और तारीख तक नहीं, 1.16 लाख तक का भुगतान संदेह के घेरे में , इस तरह कई भुगतान के राज के काग़ज़ घुन खा रहे आलमारी में…….

शासन द्वारा वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता लाने के लिए कई वर्षों से ऑनलाइन भुगतान और चेक के माध्यम से राशि देने की व्यवस्था लागू है। नगद भुगतान का प्रावधान लगभग समाप्त कर दिया गया है। इसके बावजूद रेशम विभाग रायगढ़ में अब भी नगद भुगतान किए जाने और मृत व्यक्तियों के नाम पर राशि जारी करने का मामला सामने आया है। जो आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों से यह तथ्य उजागर हुआ है कि वर्ष 2025-26 में जिले के कोटरापाली, सुकुलभठली सहित अन्य रेशम केंद्रों में बड़े पैमाने पर अनियमित भुगतान किया गया है।
क्या है पूरा मामला
1. सुकुलभठली केंद्र
छ.ग. रेशम परियोजना सुकुलभठली के टसर कोसा फल उत्पादन के भुगतान पत्रक वर्ष 2025-26 के अनुसार तडोला और सुकुलभठली के 6 हितग्राहियों – कृष्ण कुमार, दुलारी, उत्तम, करण, विदेशी और हेतराम के आश्रित 290 सदस्यों को 13,450 कोसा फल के बदले 36,240 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।
आश्चर्यजनक रूप से इस भुगतान पत्रक में यह उल्लेख नहीं है कि राशि ऑनलाइन दी गई, चेक से दी गई या नगद। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि भुगतान किस शासकीय चेक के माध्यम से हुआ।
इसी कड़ी में इन्हीं सदस्यों को पुनः 1 लाख 35 हजार 4 रुपये नगद भुगतान किया गया है। इस पत्रक में न तो भुगतान की तारीख अंकित है और न ही राशि प्राप्तकर्ताओं के हस्ताक्षर।
2. कोटरापाली केंद्र
यहां 5 महिलाओं के नाम पर 1 लाख 16 हजार 464 रुपये जारी किए गए हैं। इनमें से लगभग 80 हजार रुपये 3 महिलाओं को नगद दिए गए हैं। जांच में पता चला कि इन महिलाओं में से कुछ की मृत्यु पहले ही हो चुकी है।
विभाग का आंकड़ा
रेशम विभाग रायगढ़ के अनुसार जिले में कुल 23 महिला समूह कार्यरत हैं। साथ ही 5 व्यापारियों और बुनकरों के नाम भी जारी किए गए हैं।
पारदर्शिता पर सवाल
वर्तमान कैशलेस युग में बिना तारीख, बिना हस्ताक्षर और नगद भुगतान का होना सीधे-सीधे शासकीय राशि के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। दस्तावेजों को देखने पर प्रथम दृष्टया ही अनियमितता स्पष्ट नजर आती है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो। विभाग के उच्चाधिकारियों और शासन के शीर्षस्थ लोगों को संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि शासकीय राशि का दुरुपयोग रोका जा सके। इस संबंध में रेशम विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।
