रायगढ़ | cglivenews.in

एनटीपीसी लारा अपने सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत परियोजना प्रभावित गांवों और समीपस्थ इलाकों में सौर ऊर्जा हाईमास्ट लाइट लगाने की सराहनीय पहल कर रहा है। इसके लिए शासन के क्रेडा (CREDA) विभाग को दायित्व सौंपा गया था, जिसने टेंडर जारी कर इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाया है।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाई गई ये लाइटें कुछ ही महीनों में शो-पीस बनकर रह गई हैं।
कोडातराई में 28 लाइटें लगी, कई बंद –
जानकारी के मुताबिक कोडातराई क्षेत्र में 28 सौर ऊर्जा हाईमास्ट लाइट लगाई जा चुकी हैं और 9 जगहों पर इसे लगाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें जनपद कार्यालय, तहसील कार्यालय सहित अन्य कई प्रमुख स्थान शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कई जगहों पर ये लाइटें जल ही नहीं रही हैं, जिसमें बोरोडीपा, कनकतुरा और कोडातराई क्षेत्र की कई हाईमास्ट लाइटें शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि शाम होते ही फिर से वही अंधेरा, जिसको दूर करने के लिए ये लाइटें लगाई गई थीं।
क्रेडा का जवाब – ठेकेदार को बोला है –
इस संबंध में क्रेडा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार को 5 साल तक उसके द्वारा लगाई गई लाइटों के रख-रखाव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए ठेकेदार को अवगत करा दिया गया है और वह हर स्थान पर जाकर इसे ठीक कर रहा है।
उठ रहे सवाल –
उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी लारा द्वारा विद्युत विहीन क्षेत्रों में आवागमन को सुलभ कराने की दृष्टि से यह कवायद की जा रही है। एनटीपीसी पैसा दे रहा है, पर यदि संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी CREDA अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही बरतेगी तो यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
NTPC की मंशा गांवों को रोशन करने की है, लेकिन रख-रखाव के अभाव में शासन की यह योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। जरूरत है कि CREDA और संबंधित ठेकेदार को तय समय में सभी बंद लाइटों को चालू करना चाहिए, नहीं तो यह CSR की राशि का दुरुपयोग ही माना जाएगा।
