3730 हे फर्जी रकबे से होती थी खरीदी, पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा इस जिले में की गई रकबे में कमी @ हरि अग्रवाल

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जांजगीर-चांपा। पूरे प्रदेश के साथ ही जांजगीर-चांपा जिले में आज से धान की खरीदी शुरू हो गई है। कांग्रेस सरकार ने किसानों को समर्थन मूल्य 25 सौ रुपए देने से पहले जिस तरह धान का अवैध भंडारण व परिवहन के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कराई उससे सभी सकते में है। तो वहीं 3 हजार 730 हेक्टेयर फर्जी रकबे को कम किया गया है। जाहिर है इतने सालों से फर्जी रकबे के जरिए बिचौलिए चांदी काट रहे थे।

खाद्य विभाग से जारी एक रिपोर्ट ने शासन-प्रशासन के कान खड़े कर दिए है। रिपोर्ट ने साबित कर दिया है वर्ष 2018 तक किस तरह फर्जी रकबे के जरिए बिचौलियों ने करोड़ों का वारा न्यारा किया है। इसके बावजूद अब तक इस गंभीर मसले पर शासन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। ऐसा नहीं है कि यह मामला छिपा हो, बल्कि मीडिया के जरिए लगातार फर्जी रकबे से धान खरीदी किए जाने की खबरें आती रही लेकिन शासन प्रशासन ने कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। इधर, प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद धान खरीदी पर पैनी नजर रखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण किसानों को प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य 25 सौ रुपए देने की घोषणा है। शासन के निर्देश पर कलेक्टर जेपी पाठक ने पहले धान का अवैध भंडारण व परिवहन के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कराई। प्रशासन की दस टीमों ने लगातार कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 80 प्रकरण बनाया, जिसमें करीब 20 हजार क्विंटल धान और कई वाहन भी जब्त किए। इसके अलावा फर्जी रकबे की भी जांच कराई गई। 30 नवंबर तक की स्थिति में जिले भर के 120 सेवा सहकारी समिति अंतर्गत कुल 3 हजार 730 हेक्टेयर रकबे को फर्जी घोषित किया गया है। इसका आशय यही है कि इतने सालों से यही फर्जी रकबे के सहारे बिचौलिए किसानों का हक मार रहे थे। अब देखना होगा कि फर्जी रकबे का मामला सामने आने के बाद प्रशासन किस तरह का कार्रवाई करता है।

सबकी आंखें रह गई फटी की फटी
खाद्य विभाग से प्राप्त रिपोर्ट से सबकी आंखें फटी की फटी रह गई है। रिपोर्ट की समीक्षा करने पर नवागढ़ क्षेत्र का तुलसी एक ऐसा गांव है जहां 209.285 हेक्टेयर रकबा कम हुआ है। पहले यहां का कुल रकबा 1279.794 था जो 209.285 हेक्टेयर कम होने से यहां का कुल रकबा 1070.509 हेक्टेयर हो गया है। इससे कहा जा रहा है कि इतने सालों तक यहां 209.285 हेक्टेयर रकबे से फर्जी धान की खरीदी हो रही थी। वहीं दूसरे नंबर पर शिवरीनारायण है जहां 148.972 हेक्टर रकबा कम हुआ है। तीसरे पायदान में केरा गांव है, जहां का 129.427 हेक्टेयर रकबा कम हुआ है। हमारे टॉप फाइव के चौथे नंबर पर चरौदा गांव का 107.032 हेक्टेयर, पांचवें नंबर पर सरखों गांव का 76.417 हेक्टेयर रकबा कम हुआ है। अब सवाल उठता है प्रशासन ने फर्जी रकबे की छंटनी तो कर दी, लेकिन क्या फर्जी रकबा बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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