सावन के आखिरी सोमवार को जैजैपुर में विराजमान गौरी कन्या मंदिर में उमड़ा भक्तों ंका रेला, प्रदेश कांग्रेस सचिव डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर ने पूजा कर की अमन व शांति की कामना

0
29

जांजगीर-चांपा। जैजैपुर विधानसभा मुख्यालय के पुराना बाजार स्थित गौरी कन्या मंदिर जिले का पहला ऐसा मंदिर है जहां शिव लिंग और गौरी कन्या की प्रतिमा एकसाथ है। यहां सावन और महाशिवरात्रि पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है। सावन के अंतिम सोमवार को कांवरियों और भक्तों का रेला उमड़ा। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के सचिव डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर ने शिरकत करते हुए देश में अमन व शांति कायम करने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की।

जैजैपुर नगरवासियों ने बताया कि यह अद्भूत शिवलिंग 3 फीट उंची है तो वहीं करीब साढ़े पांच फीट गोलाई में है। शिवलिंग दुर्लभ और अष्टभुजी है। मंदिर के भीतर ही अत्यंत सुंदरी साक्षात गौरी कन्या की प्रतिमा एक शिल्प पत्थर में अंिकत है। मान्यता के अनुसार कई सौ वर्ष पहले गौरी कन्या यहीं की राजा की पुत्री रूपवती सती कन्या थी। किसी जमाने में कोई बड़ा राजा गौरी कन्या की सुंदरता को देखकर आक्रमण कर दिया और राजा को बंदी बनाकर गौरी कन्या को ढूंढने लगे। यह गौरी कन्या 12 वर्ष से भगवान शिव की पूजा करती रही थी। साथ ही गोपनीय रास्ते से यह मंदिर पहुंचकर भगवान से प्रार्थना की कि प्रभुु अगर मैं सच्चे मन से आपकी पूजा करतीं हूं तो हमारी रक्षा करें। उसी दिन से वह बगल में मूर्ति बनकर विराजमान है। वहीं अपनी अपार सुंदरता की वजह से उन्होंने भक्तों का मन मोह लिया। गौरी कन्या का महल जो वर्तमान में थाना है, वहीं सुबह 4 बजे उठकर अपने सहेलियों सहित फुलवारी में फूल तोड़ने जाती थी।

वहां से कनकन कुईया स्नान करने जाती थी तथा गोड़ धोवाई तालाब में पैर धोकर शिव मंदिर में पूजा करती थी। वर्तमान में पहचान स्वरूप सबकुछ विद्यमान है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 01.07.1989 को नगरवासी रत्थुराम चंद्रा व उनकी धर्मपत्नी स्व. अमरीका बाई चंद्रा के द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया था। मंदिर का दरवाजा उनके दोनों पुत्रों अनिल चंद्रा व राजकुमार चंद्रा सहित परिवार द्वारा जलाभिषेक करके भक्तों के लिए आशीर्वाद व मनोकामना पूर्ण करने पूजा अर्चना के लिए समर्पित किया। तब से अब तक अनवरत पूजा अर्चना की जा रही है। इसके साथ ही मां चंद्रहासिनी के घाट से जल भरकर 65 किमी दूरी से चलकर और बोलबल के जयकाारे लगाते हुए भक्त यात्रा के जरिए यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा शिव की नगरी से 22 किमी दूर बरेकेलघाट (हसौद) से जल भरकर कांवरिए जल भरकर यहां पहुंचते हैं। इसी तरह 45 किमी दूर मां संवरीन की दरबार शिवरीनारायण से भी भक्त जल लेकर बाजे गाजे के साथ बोल बम का नारा लगाते हुए जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। इन कांविरयों और शिव भक्तों के लिए जैजैपुर क्षेत्र से पूरे रास्ते भर स्वलपाहार की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा उनके भक्तिमय मनोरंजन के लिए नाच गान की भी व्यवस्था की गई थी। शिव की नगरी जैजैपुर में भगवान त्योहार मनाकर खुशियां मनाई जाती है और भक्त आशीर्वाद प्र्राप्त करते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here