समाजसेवा के प्रति सच्ची श्रद्धा के चलते अफरीद के युवक ने बेच दी अपनी साढ़े तीन एकड़ जमीन…

0
40

हरि अग्रवाल…

जांजगीर-चांपा।   द रियल हीरो में आज हम उस शख्स की स्टोरी लेकर आए हैं, जिन्होंने दीन-दुखियों की सेवा के लिए अपनी साढ़े तीन एकड़ पुश्तैनी जमीन ही बेच दी। बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रानिक का व्यवसाय प्रारंभ किया था, लेकिन उनके परदादा स्व. तिलकसाव राठौर की समाजसेवा के प्रति किए गए उल्लेखनीय कार्य ने उन्हें जरूरतमंदों की सेवा करने की ओर प्रेरित किया। तीन साल पहले उन्होंने समाजसेवा करने के ध्येय से तिलक सेवा संस्थान की स्थापना की। उस समय संस्था में मात्र तीन शख्स थे, लेकिन तीन साल बाद संस्था में 31 लोग हैं। खास बात यह है कि यह संस्था सरकारी मदद लेने के बजाय खुद के दम पर संचालित है। पेश है अफरीद निवासी केशव सिंह राठौर के जीवन से जुड़े कई ऐसे रहस्य, जिससे कई लोग अंजान है।

बम्हनीडीह विकासखंड अंतर्गत ग्राम अफरीद में शिक्षक गौरीशंकर राठौर के यहां 8 मई 1981 में जन्मे केशव ने अपनी शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी की। उन्होंने बायोलाॅजी विषय लेकर बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने गांव में ही इलेक्ट्रानिक व्यवसाय शुरू किया, लेकिन उनका मन व्यवसाय में नहीं लगा। आपकों बता दें कि उनके परदादा स्व. तिलक साव राठौर अंचल के प्रसिद्ध समाजसेवी है। गांव के सभी स्कूल उन्हीं के प्रयास से प्रारंभ हुए। इसके अलावा उनके समाजसेवा के प्रति समर्पण भाव की चर्चा आज भी होती है। इससे प्रेरित होकर केशव ने भी दीन दुखियों की सेवा करने का निर्णय लिया। उन्होंने तीन साल पहले तिलक सेवा संस्थान की स्थापना की। उस समय संस्था में केशव के अलावा छतराम सिंह राठौर व लगनसाय बरेठ ही थे, लेकिन लगातार सामाजिक गतिविधि के कारण आज संस्था में 31 लोग आ गए हैं। अहम बात यह है कि संस्था प्रारंभ करने उनके समक्ष सबसे बड़ी समस्या आर्थिक थी। ऐसे में उन्होंने अपनी साढ़े तीन एकड़ पुश्तैनी जमीन को ही बेच दी। शुरू में केशव ने ढाई एकड़ जमीन बेचकर संस्था की स्थापना की। वहीं बाद में फिर एक एकड़ भूमि सरकार के फोरलेन सड़क में निकल गई। ऐसे में केशव ने मुआवजे के तौर पर मिली राशि को भी संस्था में लगा दिया। संस्था का मुख्य उद्देश्य निर्धन, असहाय बच्चों व वृद्धजनों के लिए आश्रम का संचालन करना, विधवा व परित्यकता महिलाओं के लिए आश्रम की व्यवस्था कर उनके लिए गृह उद्योगों की व्यवस्था के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर करना, मां सेवार्थ गौशाला का संचालन करना, हर साल निर्धन कन्याओं का विवाह कराना, शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को संस्था के माध्यम से क्रियान्वयन करने के लिए प्रयासरत, निःशुल्क गुरूकुल विद्यालय का संचालन, कैंसर पीड़ितों को उचित मार्गदर्शन सहायता प्रदान करना आदि है। इस संस्था ने आज तक सरकारी मदद नहीं ली है। अभी इस संस्था में 18 बच्चे हैं। इनके माता-पिता या तो अत्यंत निर्धन है या फिर एकल है। इन्हें आवास, भोजन, कपड़े, शिक्षा, मेडिकल के अलावा सभी सुविधाएं दी जा रही है। अपने उल्लेखनीय कार्य के लिए इस संस्था को अनेक पुरस्कार मिल चुका है।

केशव का संदेश

केशव लोगों को संदेश देते हुए कहते हैं जरूरतमंदों की मदद करना समाज का कार्य है और इस कार्य में समाज के लोगों को आगे आना चाहिए। संसार के सभी मनुष्य को भगवान ने ही यहां भेजा है। यहां यदि कोई अभाव में जी रहा है लेकिन सामने वाला सक्षम है तो उसे उसका सहयोग करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। इसी उद्देश्य को लेकर संस्था की स्थापना की गई है। संस्था द्वारा निःशुल्क गुरूकुल विद्यालय संचालित है। यहां बच्चों की उच्च स्तरीय शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति के अनुरूप संस्कारित जीवन जीने के लिए शिक्षा प्रदान की जा रही है। केशव ने बताया कि भारतीय संस्कृति के आधार गाय, गंगा व गीता के सम्मान की रक्षा के लिए 2500 किमी की पैदल यात्रा के लिए संस्था परिवार संकल्पित है।

केशव का परिचय

नाम – केशव सिंह राठौर

पिता – गौरीशंकर राठौर (शिक्षक)

जन्म – तिथि 8 मई 1981

शिक्षा – बीएससी

उपलब्धि –  समाजसेवा के लिए बेच दी अपनी साढ़े तीन एकड़ जमीन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here