संपत्ति कर निर्धारण में नगरपालिका बरत रही लापरवाही, निर्माण के दौरान इंजीनियर भी नहीं करते निरीक्षण, मनमानी चरम पर

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चांपा। शहर में भवनों का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है, लेकिन नगरपालिका परिषद चांपा संपत्ति कर के निर्धारण में लापरवाही बरत रही है। नियमतः भवन का निर्माण 30, 60 व 90 फीसदी पूरा होने पर इंजीनियर द्वारा निरीक्षण किया जाना है, लेकिन ऐसा नहीं होता। इसके अलावा नवनिर्मित मकान परिसर में न्यूनतम पांच पौधों का रोपण किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद इन सबकी अनदेखी की जा रही है।

औद्योगिकरण के साथ ही चांपा में आवासीय परिसर की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर की आबादी करीब 60 हजार पहुंच गई है, जिसके मद्देनजर मकानों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है। मकान बनाने से पहले नगरपालिका परिषद से अनुमति लेने का प्रावधान है। मकान मालिक द्वारा अनुमति लेने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाता है, तब नपा भवन का संपत्ति कर निर्धारण करती है। खास बात यह है कि भवन के 30, 60 व 90 फीसदी बनने पर इंजीनियर द्वारा निरीक्षण करने का प्रावधान है। निरीक्षण से यह पता चल जाता है कि भवन मालिक भूतल की अनुमति लेकर कहीं उससे ज्यादा निर्माण तो नहीं करा रहा है। लेकिन यहां किसी भवन का निरीक्षण नहीं किया जाता। शहर में अभी भी कई जगहों में भवन निर्माण हो रहा है, जिन्होंने नपा से अनुमति लेना भी मुनासिब नहीं समझा है। इसके अलावा कई लोगों ने भूतल की अनुमति लेकर दो से तीन माले का मकान बनाया है। भवन निर्माण की अनुमति इसी शर्त पर दी जाती है कि वह अपने परिसर में कम से कम पांच पौधों का रोपण करेगा। लेकिन ज्यादातर लोग पौधरोपण करने भी रूचि नहीं लेते। पूर्व पार्षद गोविंद देवांगन ने संपत्ति कर निर्धारण के संबंध में नपा से जानकारी मांगी थी, लेकिन उसे गोलमोल जवाब देकर चलता कर दिया गया था।

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