शुरू होने से पहले खंडहर हुआ कन्या छात्रावास, चांपा कालेज की अजा, अजजा छात्राएं अप-डाउन करने मजबूर…

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जांजगीर-चांपा। एमएमआर पीजी कालेज में उद्घाटन के बाद भी पांच सालों से कन्या छात्रावास में ताला लटका हुआ है। कालेज प्रबंधन ने छात्रावास के चारों ओर बाउंड्रीवाल के लिए करीब 17 लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा है। इसे अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इसके कारण लाखों रुपए का भवन खंडहर में तब्दील हो रहा है। भवन की दीवार में दरारें पड़ गई है। छात्रावास का लाभ नहीं मिलने अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग की छात्राएं अब भी पढ़ाई के लिए अप-डाउन करने मजबूर हैं।

शासकीय एमएमआर पीजी कालेज चांपा में आसपास गांवों सहित दीगर जिले से भी छात्र-छात्रा अध्ययन करने पहुंचते हैं। यहां संचालित एमएसडब्लू, बीजेएससी, टसर टेक्नालिजी सहित अन्य पाठ्यक्रमों के लिए खासकर छात्राओं को अप-डाउन करना पड़ता है। इस फेर में जहां छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है, वहीं उन्हें अनावश्यक शारीरिक, मानसिक व आर्थिक परेशानी होती है। इस समस्या से छात्राओं को निजात दिलाने कालेज प्रबंधन ने पीडब्लूडी के जरिए कालेज परिसर में ही 38 लाख 15 हजार रुपए की लागत से कन्या छात्रावास का निर्माण करवाया। लोक निर्माण विभाग ने छात्रावास भवन का काम पूर्ण कर बीते 6 अप्रैल 2011 को इसे प्रबंधन को हैंडओव्हर कर दिया। कालेज प्रबंधन ने बीते 12 जनवरी 2012 को पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष नारायण चंदेल, पूर्व राज्य उर्दू अकादमी अध्यक्ष सलीम मेमन व पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रदीप नामदेव के हाथों छात्रावास का उद्घाटन कराया। इसके बाद से छात्रावास भवन में ताला लटका हुआ है। हालांकि कालेज प्रबंधन ने उच्च शिक्षा विभाग को छात्रावास भवन के चारों ओर बाउंड्रीवाल कराने का प्रस्ताव भेजा है। लेकिन इस प्रपोजल को अब तक हरी झंडी नहीं मिली है। इस कारण बीते पांच साल से बंद पड़े भवन को इसके खुलने का इंतजार है। इधर खासकर अजा व अजजा वर्ग की छात्राएं छात्रावास भवन बनने के बाद भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है और वे अब भी अप-डाउन करने मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर, लंबे समय से भवन का उपयोग नहीं करने के कारण दीवारों में दरारें पड़ गई है।

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