शिकायत के बाद बयान से पलटने की चर्चा जोरों पर, मालखरौदा के तत्कालीन बीएमओ के खिलाफ हुई थी शिकायत

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जांजगीर-चांपा। मालखरोदा सीएचसी में डॉक्टर की लापरवाही मामले में नया मोड़ आ गया है। पहले जहां तत्कालीन बीएमओ के खिलाफ शिकायत की गई। जब इस मामले ने तूल पकड़ा, तब शिकायतकर्ता ने बकायदा शपथ पत्र देकर पहले की गई शिकायत को गलत करार दिया। इससे समझा जा सकता है कि आखिर शिकायतकर्ता ने किस वजह से अपने पहले के बयान का खंडन किया होगा।

जैसे ही यह खबर आम हुई, तब तरह-तरह की चर्चा होने लगी है। लोगों का कहना है कि शिकायतकर्ता के शपथपत्र देने पर ही सवालिया निशान खड़ा होने लगा है। पहले शिकायत फिर अपने बयान से पलटना वैसे तो कोई नई बात नहीं है लेकिन क्या सच में शिकायतकर्ता बिना किसी दबाव या प्रलोभन के अपनी शिकायत वापस ले रहा है इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वो भी तब जब जिनके विरुद्ध शिकायत की गई हो उसके खिलाफ कार्यवाही करने से जिले के अधिकारियों के हाथ कांप रहे हो तो इस पर यह भी सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किसकी शह में चल रहा है ये सब? दरसअल पिछले कुछ समय से मालखरौदा सीएचसी से ज्यादा राजनीतिक अखाड़ा बना हुआ है। खास करके जब से कायाकल्प योजना के तहत 10 लाख का काम स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए शासन द्वारा मालखरौदा अस्पताल में स्वीकृत हुआ तब से वहां अलग ही हवा चलने लगी है। रंग रोंगन के नाम पर दस के बदले 18 लाख खर्च कर पहले ही अस्पताल में वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई थी। हालांकि 10 लाख के बदले 18 लाख की राशि खर्च करने पर तत्कालीन बीएमओ कृष्णा सिदार को नोटिस जारी किया जा चुका है लेकिन कोई ठोस कार्यवाही होते दिखाई नहीं दे रही है। तो वहीं एक और संगीन आरोप पैसा मांग कर इलाज करने एवं मरीज को सही इलाज नहीं देने और उसकी जान से खिलवाड़ करने का आरोप डॉक्टर कृष्ण सिदार पर लगने के कुछ ही दिन बाद अचानक शिकायतकर्ता अपनी बात बदल देना इसकी निष्पक्ष जांच की जरूरत है। हालांकि लगातार अवैध लैब, क्लीनिक, वित्तीय अनियमितता सहित गलत इलाज के गंभीर आरोपों का कितना निष्पक्ष जांच हो पाएगा ये स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से देखना होगा।

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