राम कथा में सुनाया श्रीराम वनवास प्रसंग, श्रीराम के साथ माता सीता व लक्ष्मण गए वनवास

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जांजगीर चांपा। नैला के अग्रसेन भवन के सामने राजस्थान जोधपुर के सुप्रसिद्ध पंडित मुरलीधर महराज की राम कथा के छठवे दिन श्रीराम के वनवास का सुन्दर व्याख्यान किया। श्रीराम कथा के छठवे दिन कथावाचक संत मुरलीधर महाराज अपनी अमृतवाणी से बताया कि भगवान श्रीराम-सीता माता के साथ स्वयंवर से अपने घर वापस अयोध्या लौटे।

अयोध्या पति महाराज दशरथ और अयोध्या नगरी अभी राजकुमारों के विवाह समारोह का पूरी तरह आनंद भी नहीं उठा पाए थे कि कैकेई ने ऐसा दांव चला कि पूरी अयोध्या पर दुःखो का पहाड़ टूट पड़ा। कैकेयी ने महाराज दशरथ से श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांग लिया। बात बस इतनी सी थी कि राजा दशरथ राम को राज सिंहासन पर बैठाने का निर्णय लेकर उनके राज्याभिषेक की तैयारी शुरू करा दी थी। गुरु वशिष्ठ भी इस कार्य के लिए अपनी सहमति भी प्रदान कर चुके थे। इधर राजमहल में श्रीराम के राजतिलक की तैयारी होता देख देवराज इंद्र घबरा गए। उन्होंने माता सरस्वती से विनती की और कहा कि आप ऐसा कुछ करिए कि श्रीराम वन के लिए जाएं। मां सरस्वती अयोध्या जाकर कैकेयी की दासी मंथरा की बुद्धि फेर देती हैं। इसके बाद तो उसने कैकेयी की ऐसी कान भरी कि वह कोपभवन में चली गयीं, जब यह बात महाराज दशरथ को मालूम पड़ी तो वह कोप भवन मे कैकेयी को मनाने गये। संत मुरलीधर कथा में कहते है मंथरा की बात मान कर कैकई कोप भवन में चली गई। राजा दशरथ कैकई को मनाने के लिए कोप भवन में गए। कैकई ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। कैकेयी ने अपने पुत्र भरत के लिए राज सिंहासन व राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा जिसे सुनकर राजा दशरथ बेसुध हो गए। इसके बाद भगवान राम ने दशरथ दरबार पहुंच कर बिना तर्क किया बड़े ही प्रेम भाव से अपने पिता की आज्ञा को स्वीकार कर लिया। कथावाचक संत मुरलीधर ने बताया कि श्रीराम ने अपने जीवन काल में एक सच्चे पुरुष की सभी मर्यादाएं बड़े ही अच्छे ढंग से निभाईं। बोले कि ऐसे ही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम नहीं कहा जाता है उन्होंने कहा कि रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई। यह कहते हुए राम ने वनवास जाने की तैयारी कर ली। लक्ष्मण तथा सीता भी प्रभु राम के साथ वनवास जाने के लिए कहते है। श्री राम उनसे कहते हैं कि ये वनवास मुझे मिला है पर सीता व लक्ष्मण के हठ करने पर वे उन्हें साथ चलने की आज्ञा दे देते हैं।

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