मित्र की खबर पाकर भागते आते हैं कृष्ण, किकिरदा में श्रीमद भागवत महापुराण का आयोजन…

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जांजगीर-चांपा। जनपद पंचायत जैजैपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत किकिरदा गुड़ीचैक देवांगनपारा में श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन किया जा रहा है। कथा मे आज कथा ब्यास ईशानी दीदी ने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा के मित्रता की कथा विस्तार से वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि जब सुदामा द्वारिकापुरी पहुंचते हैं तो महल के द्वारपालों द्वारा सूचित किया जाता है कि सुदामा नाम का कोई ब्राह्मण आया है जो आपकों अपना मित्र बता रहा है। इतना सुनते ही भगवन श्री कृष्ण अपने राजमहल को छोड़कर दौड़ते भागते नंगे पैर बाहर चले आते है। प्रभु की इस व्याकुलता को देखकर माता रूक्मणी अचंभित रह जाती है और सोचती है। अरे ऐसा कौन आ गया। इधर श्री कृष्ण सुदामा की स्थिति को देखते है तो भगवन कि आंखो से आंसू थमने का नाम नहीं लेता। श्री कृष्ण सुदामा को अपने साथ महल ले जाते है। माता रूक्मणी के साथ उनकी खूब आदर सत्कार करते है और सुदामा से भगवन पूछते है कि भाभी माता सुशीला ने हमारे लिए क्या भेट भेजी है। सुदामा सकुंचाते हुए चिवड़े की पोटली छुपाते रहते है तो भगवन श्री कृष्ण उनसे पोटली को छीनकर बड़े प्रेम से एक मुठ्ठी को ग्रहण करते है और कहते है की भाभी के भेजे हुए चिवड़े बड़े स्वादिष्ट है। दूसरी मुठ्ठी को ग्रहण करने के लिए हाथ उठाते है तो माता रूक्मणी भगवान से प्रार्थना करते हुए कहती है कि दूसरी मुठ्ठी को हमारे और सारे संसार के लिए बचाए रखना भगवन श्री कृष्ण भूल जाए रहते कि मेरे मित्र के अलावा इस संसार कोई और भी है। ऐसी है भगवन श्री कृष्ण और सुदामा महराज की मित्रता। कथा श्रवण करने मुख्य यजमान मनोज देवांगन, श्रीमती भगवती देवांगन, फीरुराम देवांगन, जीवन देवांगन, अनिल गिरी गोस्वामी, महेतर देवांगन, आभा गोस्वामी, ताराचंद देवांगन, विशेष गोस्वामी, राघव थवाईत, आयुष देवांगन, मुंजन पटेल, गजेंद्र तंबोली, चंद्रशेखर पटेल, भुवनगिरी गोस्वामी, अंशुमान, रामकुमार देवांगन, कन्हैया तंबोली, संजय देवांगन, रुदर आदित्य, राजकुमार देवांगन आदि उपस्थित थे।

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