मरने के बाद किश्त लेना फायनेंस कंपनी को पड़ा महंगा,उपभोक्ता फोरम ने जमा किश्त की रकम ब्याज समेत देने किया फैसला

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जांजगीर-चांपा। वाहन लोन लेने वाले की मृत्यु होने के बाद भी वारिस को किश्त भरने मजबूर करना फायनेंस कंपनी को मंहगा पड़ गया। उपभोक्ता फोरम के फैसले के अनुसार अब कंपनी को किश्त की रकम मय ब्याज एक माह के भीतर वाद व्यय व मानसिक क्षतिपूर्ति सहित वापस करना होगा।

आवेदक पामगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम खपरी निवासी श्रीमती देवमती नायक पति स्व. शिवकुमार नायक के अनुसार उसके पति ने जांजगीर स्थित इंड्सइंड बैंक से फायनेंस पर टिपर वाहन 23 नवंबर 2017 को क्रय किया था। वाहन का चोला मंडलम बीमा कंपनी से बीमा कराया था। आवेदक के पति द्वारा वाहन का किश्त नियमित पटाया जा रहा था। इसी बीच 23 दिसंबर 2017 को शिवकुमार की असामयिक मृत्यु हो गई। इसकी सूचना आवेदक द्वारा बैंक व बीमा कंपनी को प्रदान करते हुए बचे किश्त बीमा कंपनी से वसूल करने निवेदन किया, जिस पर बैंक द्वारा आवेदक को किश्त की रकम पटाने दबाव बनाया गया, जिसके आधार पर उसने करीब 1 लाख 25 हजार रुपए बैंक को किश्त जमा किया। इस संबंध में मामला उपभोक्ता फोरम में दायर करने के बाद सभी पक्षों की सुनवाई अध्यक्ष बीपी पांडेय, सदस्य मनरमण सिंह तथा मंजूलता राठौर द्वारा की गई. सुनवाई उपरांत फोरम ने पाया कि जीवित बीमा होने के बाद भी आवेदक से वाहन किश्त की रकम लेकर बैंक द्वारा सेवा में कमी की गई है. फोरम ने मामले में फैसला सुनाया कि इंड्सइंड बैंक आवेदक श्रीमती देवमती नायक को उसके पति की मृत्यु उपरांत वसूल की गई रकम 6 प्रतिशत साधरण ब्याज सहित एक माह के भीतर वापस करे। इसी तरह शेष किश्त की रकम बीमा कंपनी से प्राप्त करे। साथ ही आवेदक को मानसिक क्षतिपूर्ति बतौर 30000 रुपए तथा वाद व्यय बतौर 5000 हजार रुपए का भुगतान एक माह के भीतर करना होगा।

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