भागवत कथा देवताओं को स्वर्ग में भी दुर्लभ हैः वर्षा पाठक, मुनुंद गांव में श्रीमद भागवत कथा का भव्य आयोजन

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जांजगीर-चांपा। श्रीमद् भागवत समस्त वेदों और शास्त्रों का सार है। जब अनेक जन्मों का पुण्योदय होता है तब हमें श्रीमद् भागवत कथा सुनने का अवसर मिलता है। यह कथा देवताओं को स्वर्ग में भी दुर्लभ है। इसलिए कथा शुरु होने से पहले उन्होंने अमृत के घड़े के बदले में उन्हें श्रीमद् भागवत कथा सुनने की इच्छा जतायी थी।

ये बातें कथावाचक सुश्री वर्षा पाठक ने कही। वो मुनुंद गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा सुना रही थी। भागवत महात्म्य कथा के अंतर्गत उन्होंने भक्ति एवं नारद संवाद विषय का वर्णन करते हुए आगे कहा भक्ति महारानी के दोनो पुत्र ज्ञान और वैराग्य जब वृंदावन में बेसुध पड़े थे, तब वहां से गुजरते हुए नारद ने उनको समस्त शास्त्रों को सुनाया। फिर भी उन्हें होश नहीं आया और जब उनको श्रीमद् भागवत की कथा सुनायी गयी तब स्वयं भक्ति महारानी अपने दोनो पुत्रों ज्ञान और वैराग्य के साथ हरिनाम संकीर्तन करने लग गयी। कथा वाचिका ने आगे कहा कि जब मनुष्य के जीवन मे दुख आता है और वह जीवन जीने की आशा छोड़ देता है तब भागवत की कथा मनुष्य को राह दिखाती है। जिस प्रकार ग्रीष्मकाल के बाद वर्षा ऋतु के आगमन पर पूरी पृथ्वी हरी भरी हो जाती है। सूखे हुए पेड़ों में नये पत्ते निकलने लगते है। फूल खिलने लगते हैं उसी प्रकार (वर्षा ऋतु रघुपति प्रिय भगति) श्री कृष्ण और राम नाम की वर्षा से मानव जीवन की व्यथा, मानव जीवन का कष्ट समाप्त हो जाता है। तत्पश्चात ग्रामवासियों को आगे धुंधुकारी की कथा श्रवण कराते हुए उन्होंनें बताया कि (धुंधुम कलहम कार्याति इति धुन्धकारिहि ) जो कलह करे, निंदनीय और धृणित कार्य करे, दूसरो को कष्ट दे वास्तव में वही धुन्धकारी है। अगर ये कार्य मनुष्य करने लगे तो समझ जाना हमारे अन्दर धुन्धकारी प्रवेश कर चुका है और इसे समाप्त करने ने लिए श्री कृष्ण नाम संकीर्तन की धारा अपने जीवन मे प्रवाहित कर लेने में ही जीव का कल्याण संभव है। इसके पहले धर्म जागरण मंच एवं समस्त ग्रामवासी मुनुन्द के सहयोग से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ आज भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाएं सज धजकर सिर पर कलश धारण कर मंगल गीत गाते हुए पूरे गाँव की भ्रमण की। ग्रामवासियों ने जगह जगह कलश यात्रा का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। कलश यात्रा की कथा स्थल पहुंचने पर मुख्य यजमानों ने श्रीमद् भागवत की आरती उतारी। कल से कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से हरि इच्छा तक चलेगी।

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