बुखार से राहत दिलाने गर्भपात की सलाह, तीन माह से गर्भवती महिला को खिला दी गर्भपात की दवा…

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हसौद। गांव के एक बंगाली डॉक्टर के कृत्य से प्रशासन पर सवाल खड़ा हो गया है। इस बंगाली डॉक्टर ने गर्भवती व बुखार से पीडि़त महिला का गर्भपात सिर्फ इसलिए कराने की कोशिश की, क्योंकि उसे बार-बार बुखार आ रहा था। तीन दिन लगातार दवा खिलाने के बाद भी जब गर्भपात नहीं हुआ तो उसने हाथ खड़ा कर दिया। इधर, गर्भ में मृत शिशु को लेकर महिला कई दिनों तक परेशान थी। आखिरकार चांपा के किसी अस्पताल में मृत शिशु को गर्भ से बाहर निकाला गया।

यह सनसनीखेज मामला जिला और ब्लाक के लापरवाह अफसरों की मेहरबानी से सामने आया है। आपकों बता दें कि हसौद में अवैध तरीके से बंगाली क्लीनिक संचालित था। मामले की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बीते 8 अगस्त को इस क्लीनिक में छापामार कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सील कर दिया। फिर भी बंगाली डॉक्टर का हौसला कहिए या फिर ब्लाक व जिला अफसरों की मेहरबानी से कुछ दिन बाद यह क्लीनिक फिर से बेधड़क चलने लगा। इसी बीच एक गर्भवती महिला इस क्लीनिक संचालक के झांसे में आ गई। पीडि़ता के मुताबिक हसौद थाना क्षेत्र के ग्राम भातमहुल की रहने वाली यह महिला तीन माह की गर्भवती थी। महिला बुखार से पीडि़त थी। वह इस बंगाली क्लीनिक में इलाज कराने बीते एक अक्टूबर को पहुंची। बंगाली दवाखाना के संचालक एसके विश्वास ने गर्भवती होने के कारण बार बार बुखार आने की बात कही और वह बुखार का इलाज करने के बजाए मोटी रकम लेकर गर्भपात करने का दवा खिलाने लगा। यहां तक महिला को बंगाली डाँक्टर ने तीन दिन तक गर्भपात की दवा खिलाई, तब शिशु की गर्भ में ही मौत हो गई। महिला का दर्द से बुरा हाल था। जब गर्भपात नहीं हुआ, तब महिला अपने पति के साथ फिर बंगाली के पास पहुंची, तब उसने फिर सेे रुपए की मांग की। लेकिन पीडि़ता ने जब रकम नहीं होने की बात कही, तब उसे जैजैपुर रेफर कर कर दिया।

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